UPI पर अभी चार्ज नहीं, लेकिन नए कानून से बदल गया भविष्य का रास्ता: Lok Sabha ने पास किया Bill

By अंकित सिंह | Aug 06, 2026

लोकसभा ने गुरुवार को 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में एक अहम संशोधन पास किया। इससे केंद्र सरकार को बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांज़ैक्शन और दूसरे नोटिफाइड डिजिटल पेमेंट तरीकों पर चार्ज लगाने की इजाज़त देने का अधिकार मिल गया है। हालांकि, इस संशोधन से तुरंत कोई चार्ज नहीं लगेगा, लेकिन यह उस कानूनी रुकावट को हटाता है जो बैंकों को ऐसे ट्रांज़ैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने से रोकती थी।

जानें इसके बारे में

यह संशोधन 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट' की धारा 10A के तहत मौजूदा प्रावधान की जगह लेता है। बिल में कहा गया है: "'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की धारा 10A में, 'इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 269SU के तहत बताए गए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के तरीके' शब्दों, अंकों और अक्षरों की जगह, 'इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का एक या ज़्यादा तरीका, जिसे केंद्र सरकार नोटिफिकेशन के ज़रिए बताए' शब्द जोड़े जाएंगे। यह बदलाव ऑफिशियल गजट में इस एक्ट के पब्लिश होने की तारीख से लागू होगा।" आसान शब्दों में कहें तो, यह संशोधन केंद्र सरकार को यह तय करने का कानूनी अधिकार देता है कि भविष्य में किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर चार्ज लगाया जा सकता है।

इस बिल के पास होने से UPI ट्रांज़ैक्शन पर अपने-आप चार्ज नहीं लग जाएंगे। बल्कि, यह सरकार को अधिकार देता है कि वह भविष्य में अलग नोटिफिकेशन के ज़रिए बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को चार्ज लगाने की इजाज़त दे सके। जब तक ऐसा कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता, UPI ट्रांज़ैक्शन मौजूदा सिस्टम के तहत ही होते रहेंगे। 

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पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A अभी बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 269SU के तहत आने वाले इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर कोई भी डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज लगाने से रोकती है। धारा 269SU के तहत, 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा सालाना टर्नओवर वाले बिज़नेस के लिए ज़रूरी है कि वे ग्राहकों को खास डिजिटल पेमेंट ऑप्शन दें, जिनमें BHIM-UPI QR कोड और RuPay डेबिट कार्ड शामिल हैं। इस कानूनी प्रावधान की वजह से, बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स अब तक नोटिफ़ाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगा पाए हैं। इस संशोधन से यह कानूनी रोक हट जाएगी, जिससे सरकार को भविष्य की पॉलिसी बनाने में ज़्यादा छूट मिलेगी।

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