EU को भारत जैसा जवाब तो किसी ने नहीं दिया होगा, रोक दिया टैंकर, पूरा यूरोप हक्का-बक्का

By अभिनय आकाश | Jul 25, 2025

दुनिया के सबसे ताकवर रीजन यूरोपियन यूनियन को भारत के जवाब का स्वाद चखा दिया है। हम बात नायरा एनर्जी और भारत के उस पलटवार की बात कर रहे हैं जिसने यूरोप, ईयू को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आपको 18 जुलाई 2025 की तारीख तो याद ही होगी जब यूरोपीय यूनियन ने अपना 18वां प्रतिबंध पैकेज रूस के खिलाफ जारी किया था। इसमें खास तौर पर रूसी क्रूड ऑयल को टारगेट किया गया। लेकिन अबकी बार ईयू ने नया पैंतरा अपनाया और कहा गया कि अगर रूस का तेल किसी तीसरे देश में रिफाइन हो रहा है और फिर ईयू भेजा जा रहा है तो वो भी प्रतिबंध की श्रेणी में आएगा और इसी आधार पर उन्होंने भारत की नायरा एनर्जी को निशाना बनाया। ईयू का दावा है कि नायरा एनर्जी रूसी क्रूड प्रोसेसेज करती है। लेकिन हकीकत तो ये है कि भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु राष्ट्र है और उसका तेल खरीदना नीतिगत अधिकार है। नायरा सिर्फ घरेलू जरूरतों के लिए क्रूड आयात करती है। न कि यूरोप को सप्लाई करती है। ईयू ने भारत की  ऊर्जा सुरक्षा को कोलैट्रल डैमेज की तरह ट्रीट किया।  

इसे भी पढ़ें: Russia Plane Crash: मुश्किल वक्त में हम साथ हैं...रूस के विमान दुर्घटना में 48 लोगों की मौत पर PM मोदी ने जताया दुख

आपको बता दें कि  नायरा एनर्जी वही कंपनी है पहले जिसे इजर ऑयल के नाम से जाना जाता था। नायरा एनर्जी गुजरात के वाडीनार में 2 करोड़ टन प्रति वर्ष क्षमता वाली तेल रिफाइनरी संचालित करती है। कंपनी के देशभर में करीब 6,800 फ्यूल आउटलेट हैं। नायरा भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता का 8% और फ्यूल रिटेल नेटवर्क का 7% हिस्सा संभालती है। ईयू का प्रतिबंध वैसे तो जनवरी 2026 से लागू होगा लेकिन भारत ने अभी से पलटवार शुरू कर दिया है। ईयू को लगता था कि भारत सिर्फ विरोध दर्ज करवाकर बैठ जाएगा। लेकिन नायरा एनर्जी ने ऐसा दांव चला है कि जिसकी कल्पना भी यूरोपिय संघ नहीं कर सकता है। नायरा ने नॉफ्ता कार्गो का एक एक्सपोर्ट टेंडर निकाला। ये कार्गो 35 हजार मीट्रिक टन का था। जिसे ईयू के एक देश को भेजा जाना था। लेकिन टेंडर में नायरा ने दो शर्तें रख दी। या तो एडवांस पेमेंट करो या फिर लीटर ऑफ क्रेडिट यानी एल सी दो वरना माल नहीं भेजेंगे। 

इसे भी पढ़ें: Russian Plane Crash: एक और ब ड़ा प्लेन हादसा, 50 यात्रियों को लेकर उड़ा रूसी विमान घने जंगलों में हुआ क्रैश

जब ईयू कंपनी ये शर्तें पूरी नहीं कर पाई तो नायरा एनर्जी ने टेंडर कैंसिल कर दिया। इतना ही नहीं उस टेंडर के बाद में मीडिल ईस्ट की एक ऑयल मेजर कंपनी को 2.5 से 3 डॉलर प्रीमीयम पर बेच दिया गया। यानी यूरोप को इससे झटका लगा है। भारत जानता है कि 2026 में ईयू के प्रतिबंध जब से लागू होंगे तब दो कंपनियां रिलायंस और नायरा एनर्जी ज्यादा प्रभावित हो सकती है। लेकिन दोनों कंपनियां अभी से रणीनित बनाने में लग गई है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती जाँच के बीच, भारत-रूस की नायरा एनर्जी ने डाउनस्ट्रीम बुनियादी ढाँचे में 70,000 करोड़ रुपये के बड़े निवेश के साथ भारत के ऊर्जा भविष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, कंपनी ने यूरोपीय संघ के नवीनतम प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें भारत के हितों के लिए हानिकारक बताया है। भारत में तीखी प्रतिक्रियाएँ झेलने वाले इस कदम में यूरोपीय संघ द्वारा रूसी कच्चे तेल से जुड़ी संस्थाओं पर शिकंजा कसने के लिए लगाए गए 18वें दौर के प्रतिबंधों में विवादास्पद रूप से नायरा एनर्जी को भी शामिल किया गया है, जो एक निजी भारतीय कंपनी है और पूरी तरह से भारतीय कानूनों के तहत काम करती है। इस निर्णय से व्यापक चिंता उत्पन्न हो गई है, तथा भारत में कई लोग इसे एक अतिक्रमण के रूप में देख रहे हैं, जो देश की ऊर्जा स्वतंत्रता और आर्थिक संप्रभुता के लिए खतरा है।

All the updates here:

प्रमुख खबरें

U-19 World Cup सेमीफाइनल में भारत का दबदबा, अफगानिस्तान के खिलाफ रनचेज़ में दिखी आक्रामकता

India-Pakistan मैच पर PCB को ICC का अल्टीमेटम, T20 World Cup से बाहर होने का बड़ा खतरा

Virat-Rohit के World Cup 2027 भविष्य पर MS Dhoni का बड़ा बयान, कहा- उम्र नहीं, Fitness देखो

MS Dhoni का बड़ा खुलासा, बताया क्यों नहीं बनेंगे Cricket Commentator, बोले- आंकड़े याद नहीं रहते