By अनन्या मिश्रा | Jul 22, 2026
हमारे खानपान और रहन-सहन का सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ता है। यही कारण है कि लोगों में आजकल नॉन अल्कोहोलिक फैटी लिवर के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। लिवर से जुड़ी यह बीमारी सिर्फ शराब की वजह से नहीं बल्कि हमारे खानपान और लाइफस्टाइल की वजह से भी होती है। वहीं सबसे खतरनाक बात यह है कि यह बीमारी धीरे-धीरे हमारे शरीर में पनपती है। वहीं समय पर ध्यान न देने पर लिवर सिरोसिस या लिवर फेलियर की वजह भी बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि फैटी लिवर के लक्षणों पर समय रहते ध्यान दिया जाए। साथ ही इसके बचाव के तरीकों को भी समझना जरूरी है।
ज्यादा तला-भुना, मीठा और जंक फूड्स खाने से लिवर में फैट जमा करता है।
खासतौर पर कमर और पेट के आसपास जमा फैट सीधे तौर पर लिवर पर दबाव डालता है।
जब बॉडी इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है। तो ब्लड शुगर और ट्राइग्लिसराइड्स दोनों ही बढ़ जाते हैं। जिससे लिवर में फैट जमा हो जाता है।
फिजिकल एक्टिविटी की कमी होने और लगतारा बैठे रहने वाली लाइफ स्टाइल भी लिवर के मेटाबॉलिक प्रोसेस को स्लो कर देती है।
स्ट्रेस और नींद में कमी होने की वजह से लिवर में फैट जमा होने का प्रोसेस बढ़ाता है।
कुछ लोगों में हार्मोनल कारणों या थायरॉइड इंबैलेंस की वजह से भी फैटी लिवर की समस्या होती है।
भूख कम लगना
लगातार थकान महसूस होना
पाचन में गड़बड़ी होना
पेट के दाहिने हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस होना
आंखों और स्किन में पीलापन होना
वेट का अचानक बढ़ना या घटना
रोजाना फिजिकल एक्टिविटी बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका है। रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट योग, वॉक या हल्की एक्सरसाइज करें।
डाइट में हरी सब्जियां, फल, ओट्स, फाइबर, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल करें। वहीं स्वीट ड्रिंक्स, तनी-भुनी चीजें, प्रोसेस्ड फूड और रेड मीट से दूर रहें।
धीरे-धीरे वेट लॉस से लिवर में फैट कम होता है। लेकिन अचानक से वेट लॉस करना नुकसानदायक हो सकता है।
ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नजर बनाए रखें। क्योंकि यह फैटी लिवर की ग्रोथ को रोकने में सहायता करता है।
मेडिटेशन, योग और डीप ब्रीदिंग जैसी चीजों को अपनाएं। इससे मानसिक शांति और हार्मोनल संतुलन बना रहे।