By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 26, 2020
नयी दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के 10वीं और 12वीं के छात्र बोर्ड की परीक्षाएं तीन बार स्थगित होने के चलते काफी निराश हैं। अब वे सीबीएसई द्वारा अपने परिणामों के आंतरिक मूल्यांकन पर टकटकी लगाए हैं, जबकि इनमें कई ऐसे छात्र भी हैं जिन्हें डर है कि ऐसा होने पर उन्हें नुकसान झेलना पड़ सकता है। बीते चार महीने से इम्तेहान की प्रतीक्षा कर रहे इन छात्रों के लिये अब यह धैर्य की परीक्षा बन गई है। उनका कहना है कि नयी मूल्यांकन योजना उनके लिए उचित नहीं हो सकती क्योंकि उनमें से कई छात्र एक भी परीक्षा में नहीं आए हैं जोकि मूल्यांकन का आधार बन सकता है।
उन्होंने कहा कि वे छात्र जो तीन विषयों की परीक्षा में बैठे थे, उनका मूल्यांकन उन तीन परीक्षाओं में मिले अंकों के आधार पर कर लिया जाएगा, लेकिन दूसरे मामलों में (जो छात्र परीक्षा में नहीं बैठ पाए) क्या किया जाएगा बृजपुरी के निवासी मोहम्म फाजिल पूछते हैं, अगर आंतरिक मूल्यांकन को पूरी तरह से हमारे प्रदर्शन का आधार बनाया जाएगा, तो हम स्कूलों के पक्षपात को कैसे झुठला सकते हैं? उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में दंगे हुए थे, जिसमें 53 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। हिंसा का सबसे अधिक प्रभाव जाफराबाद, मौजपुर, चांद बाग, खुरेजी खास और भजनपुरा पर पडा़ था।
सीबीएसई ने हिंसा के मद्देनजर 29 उत्तर-पूर्वी दिल्ली के 80 से अधिक परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षाएं 29 फरवरी तक टाल दी थीं। इसके बाद बोर्ड ने नया कार्यक्रम घोषित किया, जिसके तहत 12वीं की परीक्षाएं 31 मार्च से 14 अप्रैल और 10वीं के इम्तेहान 21 मार्च से 30 मार्च तक आयोजित किये जाने थे। हालांकि कोरोना वायरस के चलते राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद एक बार फिर परीक्षाएं टाल दी गईं। सीबीएसई ने फिर से एक नए कार्यक्रम की घोषणा की, जिसके तहत देशभर में 12वीं की परीक्षाएं और केवल उत्तर पूर्वी दिल्ली में 1 से 15 जुलाई तक परीक्षाएं आयोजित की जानी थीं। हालांकि, कोविड-10 के बढ़ते मामलों के मद्देजनर एक बार फिर परीक्षाएं रद्द कर दी गईं।