रघुराम राजन ने चेताया, कहा- कुछ भी मुफ्त नहीं मिलता, अतिरिक्त नोटों की छपाई की भी लागत है

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 23, 2020

मुंबई। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बृहस्पतिवार को कहा कि आर्थिक नरमी के बीच केंद्रीय बैंक अतिरिक्त नकदी के एवज में सरकारी बांड की खरीद कर रहा है और अपनी देनदारी बढ़ा रहा है लेकिन यह समझना चाहिए कि इसकी लागत है तथा यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कई उभरते बाजारों में केंद्रीय बैंक इस प्रकार की रणनीतिक अपना रहे हैं लेकिन यह समझना होगा कि मुफ्त में कुछ नहीं मिलता। सिंगापुर के डीबीएस बैंक द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में राजन ने कहा, ‘‘आरबीआई अपनी देनदारी बढ़ा रहा है और सरकारी बांड की खरीद कर रहा है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में वह बैंकों से रिवर्स रेपो दर पर कर्ज ले रहा है और सरकार को उधार दे रहा है।’’ 

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राजन ने कहा कि ऐसे समय जब कर्ज बहुत ज्यादा नहीं लिया जा रहा, केंद्रीय बैंक अतिरक्त मुद्रा की आपूर्ति कर सकता है और ‘‘इससे केंद्रीय बैंक और सरकार के बीच गठजोड़ बढ़ता है।’’ उन्होंने साफ किया कि इसकी सीमा है।राजन ने यह भी कहा किभारत जैसी अर्थव्यवस्थाएं एक बार पूरी तरह खुल जाती हैं, ‘लॉकडाउन’ का कॉरपोरेटे क्षेत्र पर प्रतिकूल असर दिखना शुरू होगा और बहुत सा कर्ज वापस नहीं हो सकेगा। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे इन लागतों (नुकसान) का वित्तीय क्षेत्र पर स्थानांतरित होता है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि बैंक के पास स्थिति से निपटने के लिये पर्याप्त पूंजी हो। इसे वित्तीय क्षेत्र की समस्या बनने के लिये नहीं छोड़ा जा सकता।

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