By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Dec 29, 2020
अब मध्य प्रदेश ने भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह ‘लव जिहाद’ के खिलाफ जिहाद बोल दिया है। मप्र सरकार का यह कानून पिछले कानूनों के मुकाबले अधिक कठोर जरूर है लेकिन यह कानून उनसे बेहतर है। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह कथन भी गौर करने लायक है कि यदि कोई स्वेच्छा से अपना धर्म-परिवर्तन करना चाहे तो करे लेकिन वह लालच, डर और धोखेबाजी के कारण वैसा करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उस पर 10 साल की सजा और एक लाख रु. तक जुर्माना ठोका जा सकता है।
ज्यादातर ‘धर्म-परिवर्तन’ थोक में होते हैं, जैसे कि ईसाइयत और इस्लाम में हुए हैं। ये काम तलवार, पैसे, ओहदे, वासना और डर के कारण होते हैं। यूरोप और एशिया का इतिहास आप ध्यान से पढ़ें तो आपको मेरी बात समझ में आ जाएगी। जब ये मजहब शुरू हुए तो इनकी भूमिका क्रांतिकारी रही और हजारों-लाखों लोगों ने स्वेच्छा से इन्हें स्वीकार किया। लेकिन बाद में ये सत्ता और वासना की सीढ़ियां बन गए। मजहब तो राजनीति से भी ज्यादा खतरनाक और खूनी बन गया। मजहब के नाम पर एक मुल्क ही खड़ा कर दिया गया। मजहब ने राजनीति को अपना हथियार बना लिया और राजनीति ने मजहब को !
अब हमारे देश में लव जिहाद की राजनीति चल पड़ी है। असली प्रश्न यह है कि आप लव के लिए जिहाद कर रहे हैं या जिहाद के लिए लव कर रहे हैं ? यदि किन्हीं दो विधर्मी औरत-मर्द में ‘लव’ हो जाता है और वे अपने मजहब को नीचे और प्यार को ऊपर करके शादी कर लेते हैं तो उसका तो स्वागत होना चाहिए। उनसे बड़ा मानव-धर्म को मानने वाला कौन होगा ? लेकिन जो लोग जिहाद के खातिर लव करते हैं याने किसी लड़के या लड़की को प्यार का झांसा देकर मुसलमान, ईसाई या हिंदू बनने के लिए मजबूर करते हैं, उनको जितनी भी सजा दी जाए, कम है। हालांकि इस मजबूरी को अदालत में सिद्ध करना बड़ा मुश्किल है।
-डॉ. वेदप्रताप वैदिक