उत्तराखंड में कांग्रेस शासन में दोगुनी हुई बेरोजगारों की संख्या

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 10, 2017

देहरादून। उत्तराखंड में अपने चुनावी घोषणापत्र में युवाओं के लिये बेरोजगारी भत्ता देने सहित कई बड़े वादे करने वाली सत्तारूढ़ कांग्रेस के कार्यकाल में राज्य में पिछले पांच सालों में बेरोजगारों की संख्या चिंताजनक ढंग से बढ़ कर लगभग दोगुना हो गयी है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 2015-16 में 9.38 लाख तक पहुंच चुकी है। पांच साल पहले यह संख्या 5.65 लाख थी।

वर्ष 2012 में भी कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में तीन वर्ष से लगातार रोजगार कार्यालयों में राज्य के पंजीकृत बेरोजगारों को उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुरूप 750 से 1500 रुपए की धनराशि प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ते के रूप में देने का वादा किया था हालांकि, सरकार बनने के तुरंत बाद इस 1500 रुपए की धनराशि को घटा कर 1000 कर दिया गया था। बाद में हरीश रावत के मुख्यमंत्री बनने के बाद इस बेरोजगार भत्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इस बारे में रावत ने कहा था कि उनकी सरकार ने भत्ता देने की बजाय युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराया है लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि कितने युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराये गये।

इस संबंध में पूछे जाने पर, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार कहा, ''बेरोजगारों की संख्या में बढ़ोतरी के लिये सिर्फ हम ही दोषी नहीं हैं। केंद्र द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जाने वाली नीतियों का भी हम पर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने भी हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था लेकिन उसका क्या हुआ।’’ हालांकि, उन्होंने कहा, ''यह एक गंभीर विषय है और इसीलिये हमारी सरकार ने युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिये के लिये कई छोटी-छोटी शुरुआत की हैं और उन्हें बेरोजगारी भत्ता देने की भी बात कही है।

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