SIR प्रक्रिया में बाधा बर्दाश्त नहीं, Supreme Court का West Bengal बहाने सभी राज्यों को कड़ा संदेश

By अंकित सिंह | Feb 09, 2026

पश्चिम बंगाल में विशेष जांच रिपोर्ट (एसआईआर) को लेकर सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय एसआईआर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने देगा। उन्होंने कहा कि जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां आदेश जारी किए जाएंगे, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रकार की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीजेआई ने टिप्पणी की कि सभी राज्यों को यह समझना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में दस्तावेजों के सत्यापन और अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की 14 फरवरी की समय सीमा को एक सप्ताह बढ़ाकर 21 फरवरी कर दिया।

उन्होंने तर्क दिया कि ईआरओ अर्ध-न्यायिक कार्य करते हैं और इसलिए उनके पास पर्याप्त न्यायिक अनुभव होना आवश्यक है। नायडू ने बताया कि ईसीआई ने लगभग 300 ग्रुप बी अधिकारियों की मांग की थी, लेकिन ऐसे अनुभव वाले केवल 64 अधिकारियों को ही नियुक्त किया गया, शेष नियुक्तियां वेतन समानता के आधार पर की गईं। उन्होंने कहा कि इंजीनियर जैसे अधिकारी एसआईआर के तहत न्यायिक निर्णयों को संभालने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, जिन्हें अपीलीय अधिकारियों के समक्ष चुनौती दी जा सकती है।

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सूक्ष्म पर्यवेक्षकों की भूमिका पर भी सवाल उठे। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने तर्क दिया कि मतदाताओं के नामों को बड़े पैमाने पर हटाना सूक्ष्म पर्यवेक्षकों के माध्यम से संभव नहीं है, खासकर इस प्रक्रिया के व्यापक पैमाने को देखते हुए। मामले की तात्कालिकता पर जोर देते हुए दीवान ने अदालत को सूचित किया कि एसआईआर प्रक्रिया 14 फरवरी को समाप्त होने वाली है। हालांकि, अदालत ने उसी सुनवाई के दौरान एसआईआर डेटा को अंतिम रूप देने की समय सीमा एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी।

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