America दबाव बनाने से बाज नहीं आ रहा, Iran को Donald Trump के बयानों पर पलटवार करने में मजा आ रहा

By नीरज कुमार दुबे | Apr 27, 2026

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच कूटनीति और टकराव दोनों समानांतर चल रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची इन दिनों लगातार सक्रिय कूटनीतिक दौरों पर हैं। पाकिस्तान और ओमान की यात्राओं के बाद वह रूस पहुंचे, जहां उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि हालिया बातचीत बेनतीजा रहने के लिए अमेरिका जिम्मेदार है। अराघची ने साफ कहा कि वाशिंगटन की अत्यधिक मांगों ने वार्ता को पटरी से उतार दिया, जबकि प्रगति की गुंजाइश मौजूद थी। उन्होंने यह भी दो टूक कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि पूरी दुनिया का अहम मुद्दा है। देखा जाये तो अराघची की यह कूटनीतिक सक्रियता रणनीतिक संदेशों से भरी हुई है। पाकिस्तान में उन्होंने शीर्ष नेतृत्व और सेना प्रमुख से मुलाकात कर अमेरिका तक ईरान की तथाकथित ‘रेड लाइन’ पहुंचाई, जिसमें परमाणु मुद्दा और होर्मुज जलडमरूमध्य प्रमुख हैं। ओमान में भी उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा पर चर्चा की। रूस पहुंचकर उन्होंने यह संकेत दिया कि ईरान अब बहुपक्षीय समर्थन के साथ आगे बढ़ना चाहता है।

हालांकि ईरान ने भी उसी तीखे अंदाज में जवाब दिया है। उपराष्ट्रपति इस्माइल सघाब इस्फहानी ने साफ चेतावनी दी कि अगर ईरान के तेल ढांचे को नुकसान पहुंचा तो चार गुना जवाब दिया जाएगा। यह बयान इस पूरे टकराव को सीधे आर्थिक युद्ध से जोड़ देता है।

इसे भी पढ़ें: White House Shooting पर बोले Obama- लोकतंत्र में हिंसा की जगह नहीं, Trump पर साधी चुप्पी

इस बीच, ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भी भेजा है। रिपोर्टों के अनुसार यह दो चरणों की योजना है, जिसमें पहले युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की बात है, जबकि परमाणु मुद्दे को बाद में उठाने का संकेत दिया गया है। इसके बदले में ईरान चाहता है कि अमेरिका उसकी नाकेबंदी खत्म करे।

लेकिन यह कूटनीतिक कोशिशें जमीनी हालात से मेल नहीं खा रहीं। दक्षिणी लेबनान में इजरायल के हमले लगातार जारी हैं, जिनमें कई लोगों की मौत हो चुकी है। संघर्ष विराम के बावजूद हो रहे ये हमले स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। हिजबुल्लाह ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायली सैनिकों को निशाना बनाने का दावा किया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे संकट का सबसे संवेदनशील केंद्र बन चुका है। ईरानी नेताओं ने साफ कहा है कि अब युद्ध से पहले वाली स्थिति में वापसी संभव नहीं है। यह सीधा संकेत है कि तेहरान इस रणनीतिक मार्ग को अपने प्रभाव के दायरे में रखना चाहता है।

ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई और कहा कि समुद्री सुरक्षा और फंसे हुए नाविकों की रिहाई बेहद जरूरी है। इससे साफ है कि यह संकट अब मानवीय पहलुओं को भी प्रभावित कर रहा है।

ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने भी अमेरिका को जवाब देते हुए कहा कि केवल अमेरिका के पास ही ताकत नहीं है। उन्होंने एक प्रतीकात्मक गणितीय उदाहरण के जरिए बताया कि दोनों पक्षों के बीच शक्ति संतुलन बना हुआ है। यह बयान संकेत देता है कि ईरान खुद को कमजोर मानने को तैयार नहीं है।

हालांकि पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल भी उठ रहे हैं। एक ईरानी सांसद ने कहा कि पाकिस्तान पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ नहीं है और वह अमेरिका के प्रभाव में है। इसके बावजूद तेहरान इस्लामाबाद के जरिए संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जो उसकी कूटनीतिक मजबूरी को दर्शाता है।

उधर, समुद्री क्षेत्र में भी तनाव बढ़ता दिख रहा है। ओमान के पास समुद्री क्षेत्र में तनाव उस समय और बढ़ गया जब टोगो के झंडे वाले एक रासायनिक टैंकर को ईरानी तटरक्षक बल ने रोक लिया। यह घटना शिनास बंदरगाह की बाहरी सीमा के पास हुई, जहां यह जहाज अन्य जहाजों के साथ सामान्य रूप से आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान ईरानी बलों ने उसे घेर लिया और चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। भारत के शिपिंग मंत्रालय के अनुसार जहाज पर मौजूद सभी 12 भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं, हालांकि इस घटना ने क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। इस पूरे संकट का असर वैश्विक राजनीति पर भी दिख रहा है। अमेरिका द्वारा एक चीनी रिफाइनरी पर लगाए गए प्रतिबंधों का चीन ने कड़ा विरोध किया है और इसे अवैध करार दिया है। चीन ने स्पष्ट कहा कि वह अपनी कंपनियों के हितों की रक्षा करेगा।

कुल मिलाकर देखें तो स्थिति बेहद विस्फोटक बनी हुई है। एक तरफ ईरान कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय होकर अपनी शर्तें तय करना चाहता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका दबाव और प्रतिबंधों के जरिए उसे झुकाने की कोशिश कर रहा है। जमीनी स्तर पर जारी हमले, समुद्री तनाव और राजनीतिक बयानबाजी इस संकट को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या कूटनीति इस आग को बुझा पाएगी या फिर यह संघर्ष और व्यापक रूप लेगा।

प्रमुख खबरें

Silver Hallmarking में भारी उछाल: देशभर में नए केंद्रों के साथ Bureau of Indian Standards करेगा बड़ा विस्तार

Income Tax अलर्ट: REIT-InvIT से होने वाली कमाई पर बदल गए नियम, ITR फाइलिंग में रखें खास ध्यान

Global Oil Crisis: होर्मुज संकट से $84 के पार पहुंचा Brent Crude, ईरान-अमेरिका में बढ़ी तकरार

India Neighborhood First policy: बांग्लादेश से लेकर नेपाल तक भारत का बड़ा गेम, पलटा पासा !