By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 17, 2026
ओडिशा सरकार ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टीवर्ट स्टेन्स और उनके दो बच्चों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रविंद्र पाल उर्फ दारा सिंह की सजा में छूट के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने सिंह के वकील से कहा, “आदेश को चुनौती देने के लिए जो भी आधार उठाना चाहते हैं, उठा सकते हैं। अपनी याचिका में संशोधन करें और फिर दलील दें।” पीठ ने गौर किया कि सजा में छूट का अनुरोध करने वाली याचिका खारिज करने संबंधी आदेश की प्रति सिंह के वकील को उपलब्ध करा दी गई है।
उसने 2024 में शीर्ष अदालत का रुख करते हुए समय से पहले रिहाई का अनुरोध किया था। दोषी सिंह ने दलील दी थी कि वह जेल में 24 साल से अधिक समय बिता चुका है और उसे “युवावस्था के जोश” में किए गए अपने कृत्य पर “पछतावा” है। वर्ष 1999 में 22-23 जनवरी की दरमियानी रात क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में सिंह के नेतृत्व में भीड़ ने ग्राहम स्टेन्स, उनके 11 वर्षीय बेटे फिलिप और आठ वर्षीय टिमोथी पर हमला कर उनके वाहन में आग लगा दी थी।
तीन लोगों की हत्या के इस मामले में मुख्य आरोपी सिंह को 2003 में सीबीआई अदालत ने दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। ओडिशा उच्च न्यायालय ने 2005 में उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था और 2011 में उच्चतम न्यायालय ने इसे बरकरार रखा था। स्टेन्स और उनकी पत्नी ग्लेडिस मयूरभंज इवेंजेलिकल मिशनरी के साथ काम करते थे, जो कुष्ठ रोगियों की देखभाल करती थी।
वर्ष 2005 में पद्म श्री से सम्मानित ग्लेडिस स्टेंस ने कहा था कि उन्होंने अपने पति और बेटों के हत्यारों को माफ कर दिया है तथा उनके प्रति उनके मन में कोई कड़वाहट नहीं है।