By अभिनय आकाश | Jul 16, 2026
पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच, फारस की खाड़ी के कई देश होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज) पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिशें तेज़ कर रहे हैं, क्योंकि इस संकरे रास्ते से गुज़रने वाले जहाज़ों पर बार-बार हमले हो रहे हैं। खाड़ी देशों का यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण प्रतिद्वंद्विता दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक को बाधित कर रही है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। इस तनाव से पहले, दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल और भारत की तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा हर दिन इसी रास्ते से गुज़रता था। खाड़ी देश अब अपने निर्यात को सुरक्षित रखने और भविष्य में होने वाली रुकावटों के जोखिम को कम करने के लिए परिवहन के वैकल्पिक मार्गों में निवेश कर रहे हैं।
क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने के साथ, UAE अपने ज़मीन-आधारित एक्सपोर्ट रूट के काम को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है। उसका रणनीतिक वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट अब आधे से ज़्यादा पूरा हो चुका है। क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायद ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 252 मील लंबे इस बड़े प्रोजेक्ट को 2027 की तय समय-सीमा के अंदर पूरा करें। मौजूदा फुजैराह नेटवर्क के साथ चालू होने पर, यह नई पाइपलाइन UAE की ज़मीन-आधारित कच्चे तेल के एक्सपोर्ट की क्षमता को दोगुना करके 3.6 मिलियन बैरल प्रति दिन तक पहुँचा देगी। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के प्रमुख सुल्तान अल जाबेर ने कहा कि हालिया क्षेत्रीय तनाव ने देश की लंबी अवधि की रणनीति को और मज़बूत किया है। उन्होंने पत्रकारों से कहा अभी भी दुनिया की ज़्यादातर ऊर्जा बहुत कम 'चोक पॉइंट्स' (संकरे रास्तों) से होकर गुज़रती है। ठीक इसी वजह से UAE ने एक दशक से भी पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य से न गुज़रने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करने का फ़ैसला किया था।