समान नागरिक संहिता पर Omar Abdullah का BJP पर तंज, कहा संख्या बल है तो संसद में लाएं UCC बिल

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 15, 2026

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित कराने के लिए केंद्र में पर्याप्त संख्याबल है तो उसे इस विधेयक को अलग-अलग राज्यों के बजाय संसद में पेश करना चाहिए। अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘अगर आपके पास सांसदों की पर्याप्त संख्या है तो इसे संसद में पेश कीजिए। आप इसे अलग-अलग राज्यों के जरिए क्यों ला रहे हैं?

शायद इसी वजह से वे यह रास्ता अपना रहे हैं।’’ अब्दुल्ला ने कहा कि अगर यूसीसी को केवल भाजपा शासित राज्यों में लागू किया जाता है तो यह ‘‘समान’’ या ‘‘सार्वभौमिक’’ नहीं होगा, क्योंकि भाजपा देश के सभी राज्यों में सत्ता में नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘देश के सभी राज्य भाजपा शासित नहीं हैं। ऐसे कई राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं जहां भाजपा की सरकार नहीं है।

इसलिए अगर इसे केवल भाजपा शासित राज्यों में लागू किया जाता है तो यह सार्वभौमिक कानून नहीं है और इस तरह के किसी विषय का फैसला अलग-अलग राज्यों को नहीं करना चाहिए। इसका फैसला पूरे देश के स्तर पर होना चाहिए। पूरे देश का प्रतिनिधित्व राज्यों में नहीं, बल्कि संसद में होता है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश नहीं किया, जिनके बारे में वह ‘‘जोर-शोर से प्रचार’’ करती रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘अब तक वे जिन भी विधेयकों की बात करते रहे हैं..चाहे वह ‘एक देश, एक चुनाव’ हो या आरक्षण...उन्हें संसद में नहीं लाया गया। अब यूसीसी के मामले में भी वे इसे राज्यों के जरिए लाने की बात कर रहे हैं।’’ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम होने के संबंध में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा कि यह स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा, ‘‘नियंत्रण रेखा या वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव कम करने वाला कोई भी कदम अच्छा है।

खासकर उन लोगों के लिए जो इन सीमाओं के करीब रहते हैं। हम जानते हैं कि एलओसी या एलएसी के पास रहने वाले लोगों के लिए हालात कितने मुश्किल होते हैं। इसी तरह, हमें उम्मीद है कि समय के साथ नियंत्रण रेखा पर भी स्थिति बेहतर होगी।’’ चीन द्वारा भारत की विदेश नीति की सराहना किए जाने के संबंध में अब्दुल्ला ने कहा कि नयी दिल्ली की विदेश नीति हमेशा स्वतंत्र रही है और उसे अन्य देशों से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी विदेश नीति हमारी अपनी है। हम दूसरे देशों के प्रमाणपत्र क्यों तलाशते हैं? इसमें खतरा यह है कि कल अगर चीन हमारी विदेश नीति के खिलाफ कुछ कहे, तो आप क्या करेंगे?

इसलिए, मुझे लगता है कि हमें अपनी विदेश नीति के बारे में दूसरे देशों की कही बातों को बहुत अधिक महत्व नहीं देना चाहिए, चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक, क्योंकि हम अपनी पसंद के अनुसार चीजें नहीं चुन सकते।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कल अगर विरोध होता है तो हम कहेंगे, ‘हमारी नीति में हस्तक्षेप मत कीजिए’।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम आतंकवादी हमले की निंदा किया जाना भारत की विदेश नीति की सफलता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह तथ्य कि पहलगाम हमले की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में निंदा की गई, बहुत बड़ी बात है। कृपया देखें कि उस कमरे में पाकिस्तान के कितने सहयोगी मौजूद थे।

इसलिए, पहलगाम का नाम लेकर उसका उल्लेख किया जाना भी अपने आप में हमारी विदेश नीति की सफलता है।

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