By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 15, 2026
उच्चतम न्यायालय ने गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली दिल्ली के पूर्व महापौर फरहाद सूरी की याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में सूरी ने एक आपराधिक मामले के सिलसिले में एक पत्रकार की तलाश में दिल्ली स्थित अपने आवास पर ‘‘अवैध’’ छापेमारी का आरोप लगाया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सूरी को सीधे शीर्ष अदालत का रुख करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 का सहारा लेने के बजाय प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क करने का निर्देश दिया।
पीठ ने अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली सूरी की अन्य याचिका पर भी विचार करने से इनकार कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सूरी बीएनएसएस के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल किए बिना प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे शीर्ष अदालत का रुख नहीं कर सकते। सरकार के विधि अधिकारी ने पुलिस की छापेमारी को अवैध बताए जाने का भी विरोध किया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे थे। सामान्य डायरी (जीडी) में इसकी उचित प्रविष्टि मौजूद थी। पुलिस अधिकारियों ने केवल यह पता लगाने के लिए उस व्यक्ति के घर की घंटी बजाई कि क्या वह (उपाध्याय) वहां मौजूद था।
जब उन्होंने (सूरी) मना किया तो हम वहां से चले आए। हम उनके घर में दाखिल भी नहीं हुए।’’ सूरी के वकील ने राज्य सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों के बड़े दल करीब 15 पुलिस वाहनों में याचिकाकर्ता के आवास पर पहुंचे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि सामान्य डायरी में प्रविष्टि कथित छापेमारी के बाद दर्ज की गई थी।
उपाध्याय सड़क पर वाहन चलाने को लेकर हुए एक कथित विवाद के संबंध में गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी का सामना कर रहे हैं।