By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 14, 2026
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों को घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही आतंकी धमकियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। अब्दुल्ला ने अपनी बात पर जोर देने के लिए हाल के वर्षों में कश्मीरी पंडितों पर हुए कई हमलों का उल्लेख किया। अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम बार-बार सुनते रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद समाप्त हो गया है और अब कोई (आतंकवादी) नहीं बचा है, लेकिन फिर ये धमकियां कहां से आ रही हैं?
कई कर्मचारी तो यहां से निकलने की तैयारी भी कर रहे थे। उन्हें लगभग हिरासत में लेकर उनके शिविरों में रखा गया और द्वार बंद कर दिए गए थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए इस धमकी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और इन कर्मचारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए।’’ यह पूछे जाने पर कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) की दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर से मार्च निकालने की कोई योजना है या नहीं, अब्दुल्ला ने कहा कि कई विकल्प मौजूद हैं।
अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर किया गया वादा कोई सामान्य वादा नहीं था। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वादा था। उन्होंने कहा, ‘‘यह वादा अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ?
हमें इसका जवाब नहीं मिल रहा है।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर उनकी पार्टी का विरोध प्रदर्शन अंत नहीं, बल्कि शुरुआत था। उन्होंने कहा, ‘‘आगे हमें क्या करना है, यह हम देखेंगे।’’ केंद्र शासित प्रदेश की सरकार चलाने में पेश आने वाली कठिनाइयों के बारे में पूछे जाने पर नेकां नेता ने कहा, ‘‘यह एक लंबी कहानी है और आपको अपनी दुखभरी कहानी सुनाने के लिए मेरे पास पर्याप्त समय नहीं है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम जितना कर सकते हैं, कर रहे हैं। अभी समय बाकी है।
हम इस मुद्दे को बार-बार उठाते रहेंगे। मैं इस मुद्दे पर न तो कभी चुप रहा हूं और न ही आगे चुप रहूंगा। हम इस पर बात करते रहेंगे।’’ मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि उनकी सरकार द्वारा तैयार कार्य संचालन नियमों को मंजूरी मिलेगी और उन्हें लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है... हमने अपनी ओर से पूरा लचीला रुख अपनाया। हमने इन्हें अनौपचारिक रूप से साझा भी किया। मुझे कुछ दिनों बाद विभिन्न मुद्दों पर गृह मंत्री से बात करने के लिए दिल्ली जाना है।
मैं इस मुद्दे पर भी चर्चा करूंगा।’’ अब्दुल्ला ने कहा कि मंत्रिमंडल ने आरक्षण के मुद्दे पर उठाए गए सवालों के जवाब भी दे दिए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘नियमों के अनुसार जवाब उपराज्यपाल को भेज दिया गया था। उसके बाद क्या हुआ?
कोई हमें बताए कि क्या हमारा जवाब दिल्ली भेजा गया है? क्या इसे मंजूरी मिल गई है?’’ अब्दुल्ला ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर में ‘‘जेन-जी जैसे’’ विरोध प्रदर्शन होने की स्थिति में उनकी सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अगर यहां जेन-जी जैसे घटनाक्रम होते हैं तो हम जिम्मेदार नहीं होंगे।
हमने अपना काम कर दिया है। हमने जवाब दिए हैं और अपने फैसले का औचित्य बताया है... लेकिन हमारे मंत्रिमंडल के फैसलों को इस तरह दबाकर रखना ठीक नहीं है।’’ स्थानीय निकाय चुनाव के बारे में मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव उचित समय पर कराए जाएंगे।