ओमीक्रोन : पृथक-वास की अवधि घटाकर पांच दिन करने का फैसला तार्किक नहीं

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jan 15, 2022

लंदन। (द कन्वरसेशन) ओमीक्रोन स्वरूप का मामला सामने आने के पहले ब्रिटेन में कोविड-19 के लक्षण वाले या संक्रमित लोग 10 दिनों के लिए पृथक-वास में रहते थे लेकिन नए स्वरूप के सामने आने के बाद सरकार ने गृह पृथक-वास की अवधि को सात दिन कर दिया। अटलांटिक महासागर के दूसरी ओर ‘यूएस सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन’ ने कहा कि ओमीक्रोन स्वरूप के बारे में जितनी जानकारी उपलब्ध है उसे देखते हुए वे पृथक-वास की अवधि को बदलकर पांच दिन करने वाले हैं।

इसे भी पढ़ें: 16 जनवरी को राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस के रूप में मनाया जाएगा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

कुछ लोगों का तर्क है कि ओमीक्रोन से बीमारी की गंभीरता ‘‘कम’’ है और इसके परिणामस्वरूप अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में वृद्धि नहीं होती है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि यह लहर स्वाभाविक संक्रमण और टीकाकरण-प्रेरित प्रतिरक्षा के संयोजन से प्राप्त सुरक्षा के बीच बड़े स्तर पर आबादी में फैल रही है। ब्रिटेन में कई आवश्यक सेवाएं संघर्ष कर रही हैं। तो क्या हम आर्थिक हितों को कोविड प्रबंधन योजनाओं के वैज्ञानिक औचित्य से आगे निकलते देख रहे हैं? आइए, पृथक-वास की अवधियों के वैज्ञानिक औचित्य पर विचार करें। संक्रमित लोगों के मामले में दुनिया भर के 79 वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा की गयी। इसने न केवल पीसीआर जांच द्वारा निर्धारित वायरल लोड का मूल्यांकन किया।

क्लिनिकल स्तर पर रिकवरी के बाद भी कुछ समय के लिए व्यक्ति पॉजिटव रह सकता है बल्कि इन लोगों से वायरस प्रसार की आशंका भी है। समीक्षा ने शुरुआती कुछ दिनों में कम वायरल लोड दिखाया, लेकिन फिर तीन से छह दिनों के आसपास सबसे ज्यादा, सात से नौ दिनों में वायरस खत्म हो गया और दसवें दिन वायरस की मौजूदगी नहीं मिली। दूसरे शब्दों में, आंकड़ों ने दस-दिवसीय पृथक-वास अवधि का समर्थन किया। कुछ अध्ययनों ने बिना किसी लक्षण वाले लोगों में वायरल शेडिंग की थोड़ी कम अवधि का सुझाव दिया है, लेकिन राष्ट्रीय नीति पर निर्णय संक्रमण की सभी तरह की स्थिति पर आधारित होना चाहिए न कि केवल कुछ आंकड़ों के आधार पर। जापान के एक अध्ययन में यह सामने आया कि ओमीक्रोन के कारण वायरस की मौजूदगी नहीं भी दिख सकती है। यह अध्ययन अभी किसी वैज्ञानिक शोध पत्रिका में प्रकाशित नहीं हुआ है।

अध्ययन ने व्यवस्थित समीक्षा के निष्कर्षों को प्रतिबिंबित किया है, जो यह दर्शाता है कि लक्षणों की शुरुआत के तीन से छह दिनों के बाद वायरल शेडिंग उच्चतम है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के दिन ही एक्सेटर विश्वविद्यालय का एक अध्ययन प्रकाशित हुआ, जिसमें पाया गया कि तीन में से एक व्यक्ति पांच दिनों के बाद भी संभावित रूप से संक्रमण का प्रसार कर सकता है। प्रमाण बताते हैं कि पांच दिन के पृथक-वास के कारण कई लोग अब भी वायरस का प्रसार कर रहे होंगे, जिसके परिणामस्वरूप संभावित रूप से कोरोना वायरस फैलता जाएगा।

तब सरकार किस प्रमाण का उपयोग कर रही है, जिस पर हाल में पृथक-वास की अवधि में कटौती आधारित है? सामाजिक और आर्थिक दबाव के कारण ऐसा हो रहा है। पृथक-वास की अवधि को घटाकर पांच दिन करने से संक्रमित व्यक्तियों का समुदाय में वापस जाकर संक्रामक वायरस को फैलाने का जोखिम होता है। हम अपने नीति निर्माताओं से वैज्ञानिक डेटा को देखने और एक समझदार, सूचित, सही निष्कर्ष निकालने का आग्रह करते हैं।

प्रमुख खबरें

US Immigration Fraud: भारतीय वकील Suraj Raj Singh पर 4 करोड़ का जुर्माना, फर्जी Asylum आवेदन का आरोप

1 अगस्त को Tamil Nadu जाएंगे Rahul Gandhi पर मुख्यमंत्री विजय से नहीं होगी मुलाकात

Ben Stokes की वापसी पर सस्पेंस बरकरार, Rob Key बोले- Ashes 2027 से पहले मुमकिन है धाकड़ ऑलराउंडर का कमबैक

Bombay High Court ने कचरा फैलाने की प्रवृत्ति पर जताई नाराजगी, नगर निकाय को दिए निर्देश