By गौतम मोरारका | Dec 14, 2022
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद अपने अंतिम चरण में है और अब इस केंद्र शासित प्रदेश में कमोबेश हर जगह शांति और अमन चैन है। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान की ड्रोन साजिशें नहीं हो रही हैं या फिर उसकी ओर से घुसपैठ बंद हो गयी है लेकिन जिस तेजी के साथ हर ड्रोन साजिश को विफल किया जा रहा है और हर घुसपैठिये को उड़ा दिया जा रहा है उससे आतंकवाद के हौसले पस्त हुए हैं। देखा जाये तो कश्मीर से अशांति और आतंकवाद का तेजी से नामोनिशान मिट रहा है और आने वाले समय में यह शब्द सिर्फ इतिहास के पन्नों में होंगे। जम्मू-कश्मीर की नयी पहचान आज हर घर तिरंगा, रोजगार मेले, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं के आयोजन, सिनेमाघर, शॉपिंग मॉल, पर्यटकों की भीड़ और वंचित तथा पिछड़े समाज को अधिकार मिलना हो गयी है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर वासियों को केंद्र सरकार की हर योजना का लाभ भी लगातार मिल रहा है।
डीजीपी ने एक समारोह से इतर संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस साल 56 विदेशी आतंकवादी मारे गए हैं। यह पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी संख्या है।’’ सुरक्षा उपायों को लेकर दिलबाग सिंह ने कहा, ‘‘हम हर तरह की सावधानी बरत रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि हर जगह सब कुछ ठीक होगा। हमारी सुरक्षा में कोई खामी नहीं होगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सीमा पार प्रशिक्षण शिविरों में अभी भी लोग हैं। ऐसे आतंकवादी हैं जिन्हें इस तरफ घुसपैठ कराई जा रही है। सीमा पर सुरक्षा बल सतर्क हैं।’’ खालिस्तानी और कश्मीरी आतंकवादियों के बीच संबंध के बारे में पूछे जाने पर दिलबाग सिंह ने कहा, ‘‘उनकी मां एक है, वह पाकिस्तान है।’’ दिलबाग सिंह ने कहा कि ड्रोन से हथियार गिराना एक बड़ी चुनौती है और पुलिस कुछ मामलों को सुलझाने में सफल रही है। उन्होंने कहा, ‘‘आईईडी और अन्य चीजें बरामद की गई हैं और हम इससे प्रभावी ढंग से निपटने की कोशिश कर रहे हैं।''