Operation Global Hunt से विदेशों में बैठे Drug Mafias के बीच मची खलबली, Salim Dola को दबोच कर भारत ने तोड़ डला Dawood Network

By नीरज कुमार दुबे | Apr 29, 2026

भारत की धरती पर नशे के जहर का कारोबार कर खासतौर पर युवा पीढ़ी को बर्बादी की राह पर ले जाने को आतुर अंतरराष्ट्रीय गिरोहों पर मोदी सरकार का शिकंजा कस चुका है। वर्षों तक कानून को धता बताकर विदेशों में छिपे बैठे ड्रग माफिया अब सुरक्षित नहीं हैं। हम आपको बता दें कि एक बड़ा और निर्णायक वार करते हुए भारत ने कुख्यात तस्कर और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबी सहयोगी सलीम डोला को तुर्की से वापस लाकर अपनी गिरफ्त में ले लिया है। यह कार्रवाई उस पूरे नेटवर्क के खिलाफ खुली जंग का ऐलान है जिसने देश की युवा पीढ़ी को नुकसान पहुंचाया।

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मंगलवार की सुबह जब डोला को दिल्ली लाया गया, तो यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं बल्कि सिस्टम की जीत थी। तुर्की की खुफिया एजेंसी और स्थानीय पुलिस के साथ संयुक्त अभियान में उसे पकड़ा गया। भारत पहुंचते ही उसे सीधे नशीले पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो के कब्जे में लिया गया और आगे पूछताछ शुरू हुई। जल्द ही उसे मुंबई पुलिस को सौंपा जाएगा, जहां उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

हम आपको बता दें कि सलीम डोला कोई मामूली अपराधी नहीं है। मुंबई के भायखला इलाके में मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मा यह व्यक्ति धीरे धीरे अंडरवर्ल्ड की गहराइयों में उतरता चला गया। दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील जैसे कुख्यात नामों से उसकी नजदीकी ने उसे अपराध की दुनिया में तेजी से ऊपर पहुंचाया। शुरुआत में गुटखा तस्करी से लेकर गांजा व्यापार तक सीमित रहने वाला यह व्यक्ति बाद में सिंथेटिक ड्रग्स का बड़ा खिलाड़ी बन गया।

उसका नेटवर्क इतना व्यापक था कि महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश तक फैले कारखानों में एमडी और अन्य नशीले पदार्थ बनाए जाते थे। इनका वितरण देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक किया जाता था। संगली और सूरत से लेकर यूएई और तुर्की तक फैली सप्लाई चेन को वह विदेश बैठकर नियंत्रित करता था। सलीम डोला का आपराधिक इतिहास भी उतना ही चौंकाने वाला है। 1998 में पहली बार उसका नाम सामने आया, जब वह मंड्रेक्स की बड़ी खेप को हवाई अड्डे के जरिए बाहर भेजने की कोशिश कर रहा था। वह पकड़ा गया, लेकिन सबूतों की कमजोर कड़ी ने उसे अदालत से बाहर निकाल दिया। इसके बाद तो जैसे यह उसका पैटर्न बन गया कि गिरफ्तारी, फिर रिहाई और फिर और बड़ा नेटवर्क।

हम आपको याद दिला दें कि 2012 में उसे अस्सी किलो गांजे के साथ पकड़ा गया, लेकिन पांच साल जेल में रहने के बाद वह बरी हो गया था। 2018 में उसे फिर पकड़ा गया था फेंटेनिल जैसी खतरनाक दवा के साथ। लेकिन फोरेंसिक रिपोर्ट में तकनीकी आधार पर मामला कमजोर पड़ा और वह जमानत पर छूट गया। यही वह मौका था जब उसने देश छोड़कर भागने की योजना बनाई और पश्चिम एशिया में जाकर अपना अड्डा जमा लिया।

विदेश में बैठकर उसने अपने काले धन को रियल एस्टेट में लगाया, जो उसके बेटे के नाम पर चल रहा था। यह साफ संकेत था कि उसका ड्रग साम्राज्य सिर्फ फैल ही नहीं रहा था, बल्कि मजबूत भी हो रहा था। उसके बेटे ताहिर और भतीजे मुस्तफा को पहले ही यूएई से वापस लाकर गिरफ्तार किया जा चुका है, जिससे उसके नेटवर्क को काफी झटका लगा। अब उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होगा। उसके जरिए उन तमाम कड़ियों तक पहुंचा जा सकेगा जो वर्षों से कानून से बचती रही हैं। यह भी सामने आ सकता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग्स का यह जाल फैला हुआ है और किन किन लोगों की इसमें मिलीभगत है।

मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि नशे के कारोबार के खिलाफ अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। एजेंसियां अब इंटरपोल नोटिस, संपत्ति जब्ती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए इन अपराधियों को दुनिया के किसी भी कोने से खींचकर लाने को तैयार हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल गिरोहों के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर जोर देते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “मादक पदार्थ तस्करी गिरोहों को बेरहमी से कुचलने के मोदी सरकार के मिशन के तहत, हमारी स्वापक नियंत्रण एजेंसियों ने वैश्विक एजेंसियों के एक मजबूत नेटवर्क के माध्यम से सीमापार भी अपनी पकड़ मजबूत की है।” उन्होंने लिखा, “अब मादक पदार्थ तस्कर कहीं भी छिपें, उनके लिए कोई जगह सुरक्षित नहीं है।” गृह मंत्रालय ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सलीम डोला को वापस लाया जाना, मादक पदार्थ की तस्करी से जुड़े मामलों के सभी भगोड़ों और संगठित अपराधिक गिरोहों के सदस्यों को न्याय के कटघरे में लाने के सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।” मंत्रालय ने बताया कि डोला दो दशक से अधिक समय से अपराध की दुनिया में सक्रिय है और वह महाराष्ट्र और गुजरात में हेरोइन, चरस, मेफेड्रोन, मैंड्रैक्स एवं मेथामफेटामीन की कई बड़ी खेपों की बरामदगी से जुड़े मामलों में शामिल रहा है। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रयास तुर्किये के अधिकारियों, इंटरपोल और भारतीय एजेंसियों के बीच घनिष्ठ सहयोग और समन्वित कार्रवाई का उदाहरण है।

सलीम डोला की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि अब खेल बदल चुका है। जो लोग अब तक खुद को कानून से ऊपर समझते थे, उनके लिए यह साफ संदेश है कि भागने का कोई रास्ता नहीं बचा। यह सिर्फ शुरुआत है, और आने वाले दिनों में ऐसे कई बड़े नाम कानून के शिकंजे में होंगे। देखा जाये तो भारत अब वैश्विक स्तर पर इस जहर के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है। और इस युद्ध में अब कोई नरमी नहीं होगी, कोई समझौता नहीं होगा।

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