By नीरज कुमार दुबे | Jun 19, 2026
जम्मू-कश्मीर में राजौरी के दोरिमल जंगलों में आतंकवाद के खिलाफ चल रहा महाअभियान अब 28वें दिन में प्रवेश कर चुका है। मंझाकोट सेक्टर के गंभीर मुगलान इलाके में फैले घने और खतरनाक जंगल इस वक्त बारूद, गोलियों और जवानों के अदम्य साहस के गवाह बने हुए हैं। "ऑपरेशन शेरुवाली" ने अब ऐसा रूप ले लिया है, जिसने सीमा पार बैठे आतंक के आकाओं की नींद उड़ा दी है।
सुरक्षा एजेंसियों ने जंगल के हर कोने को खंगालने के लिए जबरदस्त तलाशी और घेराबंदी अभियान तेज कर दिया है। सेना, पुलिस और दूसरी एजेंसियां मिलकर लगातार जंगलों में दबिश दे रही हैं। किसी भी संदिग्ध हलचल को पकड़ने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। इलाके में लगातार गश्त, खोजी अभियान और क्षेत्रीय नियंत्रण की कार्रवाई जारी है। सुरक्षा बलों का साफ संदेश है कि आतंकियों के लिए अब बच निकलने का कोई रास्ता नहीं छोड़ा जाएगा।
हम आपको बता दें कि मई के आखिर में शुरू हुआ यह अभियान अब राजौरी के इतिहास के सबसे लंबे आतंक विरोधी अभियानों में गिना जाने लगा है। यह केवल जंगलों में छिपे आतंकियों की तलाश नहीं, बल्कि सीमा पार से घुसपैठ कर भारत की शांति को बिगाड़ने की हर साजिश को कुचलने की निर्णायक मुहिम है। सूत्रों के अनुसार, आतंकियों ने दोरिमल और गंभीर मुगलान के घने जंगलों को अपनी पनाहगाह बना रखा था। इसके बाद सुरक्षा बलों ने बहुस्तरीय रणनीति के तहत पूरे इलाके में जबरदस्त दबाव बनाना शुरू किया।
28 मई को हालात उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गए थे, जब दोरिमल के जंगलों में भारी गोलीबारी और गोलेबारी शुरू हो गई। सुरक्षा बलों ने आतंकियों को घेरने के लिए चारों तरफ से शिकंजा कस दिया था। अधिकारियों के मुताबिक, किसी भी आतंकी को भागने का मौका न मिले, इसके लिए अतिरिक्त जवानों, हथियारों और रसद सहायता को तुरंत मोर्चे पर भेजा गया। जंगलों के भीतर ऐसा अभेद्य घेरा तैयार किया गया, जिसे तोड़ पाना आतंकियों के लिए लगभग नामुमकिन माना जा रहा है।
हम आपको यह भी बता दें कि इस अभियान के दौरान सेना ने केवल गोलियों का सामना नहीं किया, बल्कि प्रकृति की क्रूर चुनौतियों से भी लड़ाई लड़ी है। सात जून को एक भारतीय जवान ने इसी अभियान के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया। जानकारी के मुताबिक, जवान दुर्गम पहाड़ी इलाके में आतंक विरोधी कार्रवाई के दौरान आगे बढ़ रहा था कि अचानक उसका पैर फिसल गया और वह चट्टान से नीचे जा गिरा। गंभीर रूप से घायल जवान को तुरंत इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन वह जिंदगी की जंग हार गया।
राजौरी का यह अभियान देश की सुरक्षा और शांति के लिए चल रही वह कठोर जंग है जिसमें जवान दिन रात अपनी जान जोखिम में डालकर आतंक के खात्मे का संकल्प निभा रहे हैं। लगातार 28 दिनों से चल रही यह मुहिम साफ दिखा रही है कि भारत आतंक के खिलाफ किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है।
हम आपको बता दें कि दोरिमल के जंगलों में अभी भी तलाशी अभियान जारी है। सुरक्षा बल हर झाड़ी, हर चट्टान और हर पहाड़ी दर्रे को खंगाल रहे हैं। पूरा इलाका सेना की निगरानी में है और जवान लगातार मोर्चे पर डटे हुए हैं। आतंकियों के खिलाफ यह शिकंजा जितना लंबा खिंच रहा है, उतना ही यह साफ हो रहा है कि सुरक्षा बल इस बार किसी भी कीमत पर मिशन अधूरा नहीं छोड़ेंगे।
इसी बीच, जम्मू-कश्मीर में आतंक और अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने एक और बड़ा खुलासा कर दिया है। शोपियां जिले में पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर उनके पास से विस्फोटक सामग्री और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर बरामद किए हैं। पुडसू इलाके में हुई इस कार्रवाई के दौरान दो ग्रेनेड, ढाई किलोग्राम प्लास्टिक विस्फोटक, चार मोबाइल फोन और आतंकी संगठन से जुड़ी सामग्री जब्त की गई। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान एजाज अहमद खांडे, अरबाज अहमद मीर और नासिर अहमद डार के रूप में हुई है, जो 31 मई से अपने घरों से गायब बताए जा रहे थे। इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ा दी है, क्योंकि घाटी में आतंकी नेटवर्क अब नए सिरे से अपने पैर जमाने की कोशिश में जुटा दिखाई दे रहा है।
वहीं दूसरी तरफ सांबा जिले में नशे के काले कारोबार पर भी प्रशासन ने जबरदस्त चोट की है। पुलिस ने मादक पदार्थ तस्कर नारायण शर्मा उर्फ शूना की दो करोड़ आठ लाख रुपये से ज्यादा की संपत्ति कुर्क कर दी है। कुर्क की गई संपत्तियों में आलीशान मकान, कार और करोड़ों की जमीन शामिल है। जांच में सामने आया कि यह पूरी संपत्ति नशे के धंधे से कमाए गए पैसों से खड़ी की गई थी। फिलहाल आरोपी केंद्रीय कारागार कोट भलवाल में बंद है। इस तरह, आतंक और नशे के गठजोड़ पर हो रही लगातार कार्रवाई यह साफ संकेत दे रही है कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी मोर्चे पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।