हमारी करोड़ों रूपए की सफाई मशीन (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Oct 06, 2025

पिछले दिनों उन्होंने दो स्वीपिंग मशीनों का परिचय मीडिया से करवाया, आइए देखिए हमारी कर्मठ सरकार द्वारा खरीदी, करोड़ों रूपए की स्वीपिंग मशीन। 

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मंत्रीजी बोले, अब हमारी सरकार है, हम जैसे मर्ज़ी सफाई करवाएं। इन विपक्ष वालों को क्या पता कि कैसे, कुछ करना चाहिए। स्वच्छ वायु कार्यक्रम चलते हमारा भी तो कर्तव्य बनता है। गांव की वायु तो स्वच्छ ही होती है। हमारे विकसित शहर हमारा सम्मान हैं। यहां सफाई और स्वच्छता ज़्यादा ज़रूरी है इसलिए हमने बढ़िया मशीनें विदेश से मंगाई हैं। हमारी मंगवाई करोड़ों की मशीनें, एक ही दिन में कई किलोमीटर सड़क की सफाई कर देंगी। वीआईपी मूवमेंट के दौरान कमाल की सफाई होगी, हाथ से... मतलब मैन्युअली सफाई... साफ़ सुथरी नहीं हो पाती।   

मंत्री होने के बावजूद उन्हें पता है कि सफाई कर्मचारियों को दस्ताने, बूट, वर्दी वगैरा बेहतर क्वालिटी के नहीं मिल पाते क्यूंकि सप्लाई ही घटिया होते हैं। इस मामले में किस किस की खिंचाई करें। उन्होंने मीडिया, सोशल मीडिया और एंटी सोशल मीडिया वालों को बताया, हमारी मशीनें शहर की मुख्य सड़कों की सफाई करेंगी। यह लुभावनी मशीन, सड़कों पर जमा कचरे, धूल मिटटी को साफ करेगी। यह गर्व  की बात है कि हम अपने स्मार्ट शहर की ख़ास सड़कों की सफाई विदेशी मशीनों से करवाने जा रहे हैं। ऐसा होना विश्गुरुओं की धरती पर ही संभव है।  

इतनी सुन्दर, सुघड़, सुपर मशीन को हर किसी सड़क पर तो लेकर भी नहीं जा सकते। क्या इज्ज़त रह जाएगी मशीन की, सरकार की, मशीन बनाने और बेचने वाले की। जल्द ही इनका ट्रायल किया जाएगा फिर लाखों रुपए खर्च कर रजिस्ट्रेशन करवाएंगे। ड्राइवर सफ़ेद वर्दी पहनकर जब इसे चलाएगा तो, शानदार मशीन, शान से सफाई कर, हमारी सरकार की शान में इजाफा करेगी। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहर की रैंकिंग बढ़ जाएगी। हमें पुरस्कार मिलने की आशंका ...अ.. माफ़ करें, संभावना बलवती हो जाएगी।  

उन्होंने मन ही मन कहा, गांव में ऐसी मशीन का क्या करेंगे। वहां साफ़ सफाई की ज़्यादा ज़रूरत भी नहीं है। वहां के निवासियों को साफ़ सुथरा रहने की आदत पड़ गई तो जागरूकता फैलने लगेगी और प्रशासन के लिए परेशानी हो जाएगी। वैसे भी महंगी सुविधाओं पर विकसित लोगों का हक होता है। इतनी महंगी मशीनें सफाई करें और उस पर आम जूते पहनकर लेकर चलें यह व्याकरण... माफ़ करें समीकरण नहीं जंचेगा।  

विपक्ष के राजनेताओं ने उनसे सवाल किया कि जिस शहर में आप सवा तीन करोड़ की एक सफाई मशीन ला रहे हो, उस शहर में आम जनता के लिए सामान्य साफ़ सुथरी जन सुविधाएं यानी पेशाब घर और शौचालय नहीं है। दूसरा सवाल रहा, आप सफाई कर्मचारियों को सुविधाएं क्यूं नहीं देते। उन्हें गटर में मरने देते हैं इस पर मंत्रीजी का जवाब रहा, हर सरकार के शासन में ऐसा होता रहता है। आपकी सरकार भी बिलकुल ऐसा करती थी, अब हमारी कर रही है तो आपको तकलीफ हो रही है। आप विपक्ष वाले स्वदेशी का राग अलाप रहे हो, वो तो आप तब भी गाते थे जब आपका शासन था। आप इस शब्द पर राजनीति कर रहे हो।

उन्होंने लगभग चीखकर कहा, हम ज्यादा से ज़्यादा नागरिकों को यह लाजवाब सफाई मशीनें दिखाकर कहेंगे, आप कितने सौभाग्यशाली हैं, देखिए आपकी मातृभूमि की सड़कों की सफाई कितनी महंगी विदेशी मशीनों से करवाई जा रही है। कुछ भी कह लो जी, करोड़ों रूपए की सफाई मशीन देखने लायक होती है। डर लगता है साफ़ सुथरा हाथ लगने से कहीं गंदी न हो जाए।  

- संतोष उत्सुक

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