Constitution Day Of India 2024: हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र

By वेदव्यास | Nov 25, 2024

भारत का संविधान ही 140 करोड़ देशवासियों की आत्मा है और डॉ. भीमराव अंबेडकर ही इसकी प्रस्तावना के रचनाकार हैं। हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी, पंथ निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।‘ डॉ. भीमराव अंबेडकर को इस संविधान के आलोक में याद करते हुए जब हम भारत की खोज को पढ़ते हैं, तो लगता है कि वंदे मातरम् और जन गण मन‘ जैसी आराधना से बढ़कर कोई अन्य कविता इस धरती पर हो ही नहीं सकती। भारत का यह दिव्य सपना 26 नवंबर, 1949 से हमारे देश का मार्गदर्शक है।

इसे भी पढ़ें: International Day for the Elimination of Violence against Women 2024: चिंताजनक है महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा

इसी तरह हमने संपूर्ण मानवता के उपासकों की जगह राम-कृष्ण को हिंदुओं की, बुद्ध को बौद्धों की, हजरत मोहम्मद को मुसलमानों की, गुरु नानक को सिक्खों की, महावीर को जैनियों की तथा ईसा मसीह को ईसाइयों की चारदीवारी में ही कैद कर दिया है। यानी कि हमने नदी, पर्वत, हवा, प्रकाश, पृथ्वी तक को अपनी जाति-धर्म की पहचान में समेट लिया है तथा मां गंगा की जीवनदायी पवित्रता को भी हिंदू संस्कृति की मुख्यधारा तथा सूर्य और चंद्रमा को भी हिंदू संस्कृति के नमस्कार में बदल दिया है। आज भी हम जब महात्मा गांधी को किसी राजनीतिक पार्टी का विज्ञापन बना देते हैं और अंबेडकर को दलितों का मसीहा कहते रहते हैं, तो हम यह भूल जाते हैं कि इनका जीवन-दर्शन क्या था? हम एक कृतज्ञ राष्ट्र के रूप में भी कभी अंबेडकर के भारत के संविधान की बात क्यों नहीं करते और महात्मा गांधी की सत्य और अहिंसा को याद क्यों नहीं करते? यह सीमित समझ ही बताती है कि हम ऐसे सभी राष्ट्र निर्माताओं को एक व्यक्ति के रूप में जाति-धर्म के लिए उपयोगिता की सामग्री में बदल रहे हैं, जबकि गांधी और अंबेडकर एक विचार है तथा वह किसी संकीर्णता के हकदार नहीं हैं। महाराणा प्रताप और शिवाजी को किसी धर्म और जाति का नायक बनाना भी हमारी समझ की संकीर्णता है, क्योंकि यह सभी इतिहास पुरुष राजा और प्रजा की मर्यादा के आधार हैं।

इसलिए, हमें आज यह अवधारणा भी बदलनी होगी कि जाति और धर्म की पहचान से ही किसी देश की पहचान बनती है और विकास तथा परिवर्तन की योजनाएं चलाई जाती हैं। यदि भारत में दलितों को सामाजिक-आर्थिक समानता का अधिकार हम आज तक नहीं दे पाए हैं, तो यह डॉ. अंबेडकर और हमारे संविधान का अपमान है।

इसी तरह भारत में असत्य और हिंसा का विस्तार भी महात्मा गांधी के सपनों की अवहेलना है। भारत का संविधान ही हमें वह ताकत देता है कि-आज भी हम एक हैं और आगे-पीछे वंदे मातरम् और जन गण मन ही गा रहे हैं तथा सभी प्रकार की शपथ अपने संविधान के अंतर्गत ही ले रहे हैं।

ऐसे में, भारत का जीवन धर्म और जीवन कर्म भारत का संविधान ही है। अतः अंबेडकर को जाति-धर्म की सीमाओं में बांधकर इन्हें छोटा मत बनाइए, क्योंकि प्रेरणा के प्रकाश का कोई जाति-धर्म नहीं होता।  अतः समय की चेतावनी को समझते हुए डॉ. अंबेडकर ने कहा था कि 26 जनवरी 1950 को हम एक विरोधाभास की जिंदगी में प्रवेश करने जा रहे हैं। हमारी राजनीति में समानता होगी और हमारे सामाजिक व आर्थिक जीवन में असमानता। राजनीति में हम एक वोट और हर वोट का समान मूल्य पर चल रहे होंगे। परंतु अपने सामाजिक एवं आर्थिक जीवन में हमारे सामाजिक एवं आर्थिक ढांचे के कारण हर व्यक्ति एक मूल्य के सिद्धांत को नकार रहे होंगे। इस विरोधाभास के जीवन को हम कब तक जीते रहेंगे? कब तक हम अपने सामाजिक और आर्थिक जीवन में समानता को नकारते रहेंगे? यदि हम इसे नकारना जारी रखते हैं तो हम केवल अपने राजनीति प्रजातंत्र को संकट में डाल रहे होंगे। हमें जितनी जल्दी हो सके, इस विरोधाभास को समाप्त करना होगा, अन्यथा जो लोग इस असमानता से पीड़ित हैं, वे उस राजनीतिक प्रजातंत्र को उखाड़ फेकेंगे जिसे हम सभी ने परिश्रम से खड़ा किया है।

- वेदव्यास

(लेखक वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार हैं)

इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं। 

प्रमुख खबरें

क्रिकेट में टूटा जेंडर का बैरियर, Sarah Taylor बनीं England Mens Team की फील्डिंग कोच

Russia-Ukraine War | रूस का प्रचंड प्रहार! यूक्रेन पर 800 ड्रोनों की बारिश, जिंदा जले लोग

Kerala में 10 दिन का सस्पेंस खत्म! Congress आज करेगी नए CM के नाम का ऐलान

West Asia संकट पर RBI Governor का अलर्ट, लंबा खिंचा तो बढ़ेंगे Petrol-Diesel के दाम!