By अभिनय आकाश | Nov 04, 2026
अमेरिका के मिशिगन सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुलरहमान मोहम्मद अल-सैयद ने जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। वह अमेरिकी उच्च सदन (सीनेट) के सदस्य बनने वाले पहले मुस्लिम हैं। इस ऐतिहासिक नतीजे का असर भारत के सियासी गलियारों में भी दिखा, जहाँ AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस मौके पर उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज को एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। ओवैसी ने अमेरिकी राजनीति के इस बदलाव की मिसाल देते हुए यूपी के अल्पसंख्यकों को अपनी संगठित राजनीतिक ताकत और हिस्सेदारी बढ़ाने की नसीहत दी। मिशिगन में एक 'अब्दुल' जीत गया है; अब उत्तर प्रदेश के 'अब्दुल' को अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करनी होगी। संघियों ने 'अब्दुल' शब्द को एक ताने के रूप में इस्तेमाल करने की बहुत कोशिश की है। अब समय आ गया है कि हम दिखा दें कि 'अब्दुल' अल्लाह के सिवा किसी के सामने नहीं झुकता। अब हम और नमाज़ की चटाई नहीं बिछाएंगे।
भारतीय-अमेरिकी पिया डंडिया ने फ्लोरिडा से US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीता
भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट पिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से US हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स का चुनाव जीत लिया है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराया। मंगलवार को घोषित US मध्यावधि चुनाव के नतीजों के अनुसार, पूर्व हाई स्कूल प्रिंसिपल डंडिया को 51.9 प्रतिशत वोट मिले, जबकि असकर को 49.1 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। उनके चुनाव अभियान की वेबसाइट के मुताबिक, डंडिया पहली पीढ़ी की अमेरिकी हैं। उन्होंने अपने करियर में हाई स्कूल प्रिंसिपल, पॉलिसी लीडर और टेक्नोलॉजी इनोवेटर के रूप में काम करते हुए समुदायों को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया है। फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मीं और पली-बढ़ीं डंडिया ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाई स्कूल के प्रिंसिपल के तौर पर काम किया। बाद में उन्होंने एक ऐसा हाई स्कूल शुरू किया, जिसका मकसद कम आय वाले परिवारों के छात्रों के लिए अवसरों को बेहतर बनाना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद करना था। चुनाव अभियान की वेबसाइट के अनुसार, इस स्कूल के सभी ग्रेजुएट्स को कॉलेज में दाखिला मिला, जबकि यहां के 86 प्रतिशत छात्र कम आय वाले परिवारों से आते थे। डंडिया 28 साल की उम्र में इस स्कूल की फाउंडिंग प्रिंसिपल बनीं, जिससे वह देश की सबसे कम उम्र की हाई स्कूल प्रिंसिपलों में से एक बन गईं।