By दिनेश शुक्ल | Apr 28, 2021
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मरीजों के उपचार में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रदेश में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिये जो प्रयास किये गये, उसमें बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है। प्रदेश में अप्रैल माह में ही ऑक्सीजन की उपलब्धता पाँच गुना हो गई है। प्रदेश में 8 अप्रैल को 130 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की उपलब्धता थी, जो आज बढ़कर 540 मीट्रिक टन हो गई है। उपलब्ध ऑक्सीजन को विभिन्न मार्गों से होते हुए 18 जिलों में पहुँचाया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा प्रयास है कि सभी जिलों में मांग अनुसार ऑक्सीजन की आपूर्ति हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑक्सीजन की आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिये राज्य सरकार द्वारा 2000 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर खरीदे गये हैं। इसके साथ ही जिलों में स्थानीय व्यवस्था से भी लगभग 2 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स लगाए जा चुके हैं। प्रदेश के भोपाल, रीवा, इंदौर, ग्वालियर और शहडोल जिला चिकित्सालयों में एक करोड़ 60 लाख रुपये से नवीनतम वीपीएसए तकनीक आधारित ऑक्सीजन प्लांट्स लगाये जा रहे हैं। इस नवीनतम तकनीक से ऑक्सीजन प्लांट्स लगाने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है। इन प्लांट से बनने वाली ऑक्सीजन 50 बेड्स के लिए उपलब्ध हो सकेगी।
प्रदेश के बालाघाट, धार, दमोह, जबलपुर, बड़वानी, शहडोल, सतना और मंदसौर जिलों में 5 करोड़ 87 लाख रुपये से अधिक की लागत के डेबेल तकनीक आधारित 570 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाले ऑनसाईट ऑक्सीजन गैस जनरेटर प्लांट लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही 8 जिलों में भारत सरकार के सहयोग से पीएसए तकनीक आधारित 8 ऑक्सीजन प्लांट्स स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 6 प्लांट्स ने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। प्रदेश के 37 जिलों के लिए राज्य सरकार स्वयं के बजट से जिला अस्पतालों में पीएसए तकनीक से तैयार होने वाले नए ऑक्सीजन प्लांट्स लगा रही है। खंडवा और सारणी थर्मल पॉवर स्टेशंस के माध्यम से 7 हजार लीटर क्षमता वाले नए ऑक्सीजन प्लांट अगले 3 सप्ताह में तैयार हो जाएंगे। इन प्लांट से लगभग 200 सिलेंडर ऑक्सीजन प्रतिदिन प्राप्त हो सकेगी। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के बेड्स को ऑक्सीजन बेड्स में परिवर्तित करने के लिए पाइप लाइन डालने का कार्य भी युद्ध स्तर पर जारी है।