Pakistan की तबियत बिगड़ी! BRICS में Modi का शक्ति प्रदर्शन देख Islamabad में जबरदस्त खलबली

By नीरज कुमार दुबे | Sep 11, 2026

नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्सशिखर सम्मेलन की गूंज वैसे तो पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है लेकिन पाकिस्तान के सत्ता और रक्षा प्रतिष्ठान में इसे लेकर जबरदस्त सन्नाटा छाया हुआ है। सन्नाटा इसलिए है क्योंकि शहबाज शरीफ से लेकर असीम मुनीर तक, आसिफ अली जरदारी से लेकर ख्वाजा आसिफ तक और इशाक डार से लेकर पाकिस्तान के अन्य बड़बोले नेताओं तक की नजरें टीवी चैनलों पर लगी हुई हैं और जैसे जैसे वैश्विक नेता एक एक कर दिल्ली की धरती पर उतर रहे हैं वैसे वैसे पाकिस्तान हुक्मरानों का गला सूखता जा रहा है।

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पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा झटका मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात होने वाली है। सात साल बाद शी जिनपिंग का भारत आना अपने आप में बड़ा संकेत है। सीमा विवाद के बाद दोनों देशों ने धीरे-धीरे संवाद बहाल किया है और अब व्यापार, निवेश, सीमा प्रबंधन तथा रणनीतिक संवाद पर आगे बढ़ने की कोशिश हो रही है। पाकिस्तान के लिए समस्या यह है कि उसकी सुरक्षा रणनीति लंबे समय से इस धारणा पर टिकी रही है कि भारत को दो मोर्चों पर एक साथ दबाव में रखा जा सकता है। लेकिन अगर बीजिंग और नई दिल्ली टकराव से प्रतिस्पर्धी सह-अस्तित्व की ओर बढ़ते हैं, तो इस्लामाबाद का वह रणनीतिक गणित कमजोर पड़ सकता है। साथ ही पाकिस्तान इसलिए भी परेशान है कि यदि भारत और चीन के संबंध सुधरे तो भविष्य के भारत-पाक संघर्ष में बिना बीजिंग के सहयोग के इस्लामाबाद के लिए मैदान में कुछ घंटे टिक पाना भी मुश्किल हो जायेगा।

दूसरा मोर्चा मोदी-पुतिन समीकरण है। दोनों नेताओं की बैठक में S-400 की अंतिम यूनिट की डिलीवरी और अगली पीढ़ी के BrahMos पर चर्चा हो रही है। भारत को चार S-400 रेजिमेंट मिल चुकी हैं और पांचवीं की डिलीवरी पर रूस ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। पाकिस्तान के लिए यह इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि भारत की वायु-रक्षा और लंबी दूरी की मारक क्षमता में रूसी सहयोग उसकी सैन्य गणना को और कठिन बनाता है। आने वाले समय में BrahMos के उन्नत संस्करण और संयुक्त उत्पादन पर बातचीत इस तस्वीर को और गंभीर बना सकती है। हम आपको याद दिला दें कि पिछले साल हुए भारत-पाक सैन्य संघर्ष के दौरान रूस की एस-400 ने पाकिस्तान के लगभग सभी हमलों को निष्क्रिय कर दिया था। उस समय पाकिस्तान ने चीन और तुर्की से रक्षा उपकरण लेकर भारत पर निशाने साधे थे लेकिन एस-400 के आगे कोई नहीं टिक पाया था। ऐसे में पाकिस्तान की नजरें इस बात पर बनी हुई हैं कि भारत और रूस के बीच क्या नये रक्षा समझौते होने जा रहे हैं।

पाकिस्तान की तीसरी चिंता सऊदी अरब और चौथी ईरान को लेकर है। BRICS की मेज पर सऊदी अरब और ईरान दोनों हैं, जबकि पश्चिम एशिया अब भी संघर्ष की आग में झुलस रहा है। पाकिस्तान के लिए यह बेहद असहज परिस्थिति है क्योंकि एक तरफ वह सऊदी अरब के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को महत्वपूर्ण मानता है, दूसरी तरफ भारत के खाड़ी देशों के साथ रिश्ते लगातार गहरे हो रहे हैं। इसी बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन भारत पहुंचे हैं और मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता भी हो रही है। पाकिस्तान की चिंता यहां यह है कि सऊदी अरब के साथ वह हाल ही में मक्का पैक्ट में शामिल हुआ है। ऐसे में यदि भारत और सऊदी अरब के संबंध और मजबूत होते हैं तो मक्का पैक्ट के पैकेट की हवा पूरी तरह निकल जायेगी। साथ ही ईरानी राष्ट्रपति से मोदी की बातचीत के बाद यदि पश्चिम एशिया के हालात में सुधार होता है तो पाकिस्तान की उस पूरी कूटनीतिक कवायद पर पानी फिर जायेगा जिसके तहत कभी अमेरिका और ईरान को इस्लामाबाद बुलाकर वार्ता कराई गयी तो कभी शहबाज शरीफ और असीम मुनीर भागे भागे तेहरान और वाशिंगटन के चक्कर लगाते रहे।

साथ ही पाकिस्तान को एक और कारण से बेचैनी हो रही है। दरअसल जिस BRICS में पाकिस्तान सदस्यता चाहता है, उसी मंच की मेजबानी भारत कर रहा है और विस्तार के लिए सर्वसम्मति जरूरी होने के कारण पाकिस्तान की सदस्यता की राह में भारत की आपत्ति निर्णायक बाधा है। हम आपको यह भी बता दें कि इस समय पाकिस्तान के टीवी चैनलों और सोशल मीडिया मंचों पर चल रही डिबेटस में मोदी की सफल कूटनीति का विश्लेषण करने के साथ-साथ शहबाज और मुनीर की जोड़ी की कूटनीतिक विफलताओं पर भी खुलकर चर्चा की जा रही है।

बहरहाल, कुल मिलाकर देखें तो दिल्ली का BRICS सम्मेलन इस्लामाबाद को इसलिए भी बहुत ज्यादा असहज कर रहा है क्योंकि यह बदलते दक्षिण एशियाई शक्ति-संतुलन का आईना बनकर उभर रहा है।

-नीरज कुमार दुबे

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