By रेनू तिवारी | Sep 26, 2026
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के झूठ और दोहरे रवैये की हवा निकाल दी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ द्वारा भारत के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी और जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत ने अपने 'राइट-ऑफ-रिप्लाई' (जवाब देने के अधिकार) के तहत बेहद तीखी और करारी प्रतिक्रिया दी। न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए आतंकवाद, मानवाधिकार, लोकतंत्र और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर उसे जमकर लताड़ा।
आतंकवाद और पाकिस्तान पर भारत का रुख
गहलोत ने कहा कि मुख्य मुद्दा पाकिस्तान की "सीमा-पार आतंकवाद की पुरानी आदत" है। पिछले साल आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के पास "भागने या छिपने की कोई जगह नहीं बची है"। गहलोत ने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ खुद का बचाव करने के हमारे अधिकार का इस्तेमाल जारी रहेगा।" उन्होंने आगे कहा, "पाकिस्तान के आतंकवाद के नतीजे भुगतने होंगे।"
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को उम्मीद है कि जनरल असेंबली पाकिस्तान और उसकी नीतियों का आकलन उनके असल स्वरूप के आधार पर करेगी, न कि उसके प्रतिनिधि द्वारा किए गए दावों के आधार पर। उन्होंने कहा, "हमें भरोसा है कि यह असेंबली पाकिस्तान और उसकी नीतियों को वैसा ही समझेगी जैसी वे असल में हैं, न कि वैसा जैसा उसका प्रतिनिधि झूठ बोलकर दिखाता है।" "हर साल झूठ दोहराने से वे सच नहीं हो जाते।" गहलोत ने पाकिस्तान पर "आतंकवाद, धोखे और दोहरेपन" का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे "न तो उसे और न ही दुनिया को कोई फायदा होगा"।
गहलोत ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया
जम्मू-कश्मीर के बारे में की गई बातों का जवाब देते हुए गहलोत ने कहा कि भारत का रुख यह है कि यह केंद्र शासित प्रदेश देश का "अटूट और अभिन्न हिस्सा" है।
इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की ओर ध्यान दिलाया और असेंबली से वहां के हालात पर विचार करने को कहा। उन्होंने कहा, "अगर हमें कश्मीर पर बात करनी ही है, तो आइए पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर पर ध्यान दें।" इसके बाद उन्होंने उस इलाके के लोगों द्वारा झेली जा रही "बेवजह हत्याओं, क्रूर हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने" का ज़िक्र किया।
भारत ने पाकिस्तान के लोकतांत्रिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाए
गहलोत ने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों पर पाकिस्तान की टिप्पणियों का भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने इन टिप्पणियों को "पाखंडपूर्ण उपदेश" बताया और पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "हमने लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवीय मूल्यों के बारे में ऐसे शासन से पाखंडपूर्ण उपदेश सुने हैं, जिसकी राजधानी में इस समय अपने ही लोगों के खिलाफ़ किलेबंदी की जा रही है।"
इसके बाद गहलोत ने पाकिस्तान पर "सेना का, सेना द्वारा और सेना के लिए चलने वाला शासन" होने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि भले ही राजनीतिक चेहरे बदलते रहें, लेकिन असल में सेना ही निर्णायक ताकत बनी रहती है। उन्होंने कहा, "उनके कठपुतली नेता आ-जा सकते हैं, लेकिन हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि असल में फैसले कौन लेता है।" उन्होंने अपनी बात को पाकिस्तान के 27वें संशोधन से जोड़ा और "उसके असली शासक को दी गई आजीवन छूट" का ज़िक्र किया।
धार्मिक असहिष्णुता पर टिप्पणियों का भारत ने जवाब दिया
गहलोत ने धार्मिक असहिष्णुता के बारे में पाकिस्तान की बातों का भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां "कट्टरता और नफरत" के रिकॉर्ड वाले देश की तरफ़ से आई हैं। उन्होंने कहा, "वे दिन में सुरक्षा बनाए रखने का दावा करते हैं; असल में वे रात में आतंकवाद फैलाते हैं।"
उन्होंने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों और अल्पसंख्यकों के साथ किए जाने वाले व्यवहार का भी ज़िक्र करते हुए कहा: "दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है। कोई भी पवित्र-सी लगने वाली बात दुनिया को गुमराह नहीं कर सकती।" इसके बाद गहलोत ने जनरल असेंबली में पाकिस्तान की टिप्पणियों का ज़िक्र किया, उन्हें "अजीब" बताया और उन्हें 11 सितंबर के हमलों की 25वीं बरसी से जोड़ा।
उन्होंने कहा, "आज दोपहर, जनरल असेंबली ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की कुछ अजीब टिप्पणियां सुनीं।" गहलोत ने कहा कि यह घटना न्यूयॉर्क शहर और दुनिया द्वारा "भयानक 9/11 आतंकवादी हमले" के 25 साल पूरे होने के कुछ हफ़्ते बाद हुई है।
उन्होंने पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह "पाकिस्तानी सेना की प्रमुख अकादमी के ठीक दरवाज़े पर" रह रहा था। उन्होंने उस संस्थान की पाकिस्तानी प्रतिनिधि द्वारा की गई तारीफ़ का भी ज़िक्र किया और अपनी बात यह कहते हुए ख़त्म की कि पाकिस्तान को ख़ुद पाकिस्तानी ही "फॉर्म 47 सरकार" कहते हैं। गहलोत की ये बातें जनरल असेंबली में पाकिस्तान के बयानों पर भारत का औपचारिक जवाब थीं।
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