Fuel-LPG Shortage in India | ईंधन संकट की अफवाहों से देशभर में मची अफरातफरी, पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें, सरकार ने दी धैर्य रखने की सलाह

By रेनू तिवारी | Mar 13, 2026

पिछले कुछ दिनों से ईंधन की कथित कमी की खबरों ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। गुरुवार को देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल पंपों और एलपीजी वितरण केंद्रों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी गईं। इस स्थिति ने न केवल आम जनता को परेशान किया है, बल्कि रेस्तरां, स्कूल और कैटरिंग सेवाओं के कामकाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालना शुरू कर दिया है। हालांकि सरकार ने संसद में कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद पेट्रोल, डीजल और केरोसिन की कोई कमी नहीं है और यह अफवाहें फैलाने का समय नहीं है। उत्तराखंड सरकार ने अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर वाणिज्यिक गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का निर्णय किया है और जरूरत पड़ने पर व्यावसायिक उपयोग के लिए लकड़ी उपलब्ध कराने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

सरकार का रुख: 'कमी नहीं, घबराएं नहीं'  

काफी हद तक वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर भोजनालयों और त्वरित सेवा रेस्तरां श्रृंखला में डर है कि आपूर्ति में पाबंदियां लगने से उनका कामकाज बाधित हो सकता है और लागत बढ़ सकती है। देश के कई हिस्सों में कुछ भोजनालयों को अपना कामकाज सीमित करना पड़ा है। ‘तमिलनाडु होटल्स एसोसिएशन’ के अनुसार राज्य में छोटे और मध्यम रेस्तरां बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। चेन्नई के कई प्रतिष्ठित भोजनालयों को घटते गैस भंडार को बचाने के लिए डोसा और ‘फ्राइड राइस’ जैसे ज्यादा गैस खपत वाले व्यंजन परोसना बंद करना पड़ा है।

व्यावसायिक क्षेत्र पर संकट के बादल 

दिल्ली के एक रेस्तरां मालिक ने कहा, “सिलेंडर की कमी है। दोगुनी कीमत करीब 1,500 से 2,000 रुपये देने पर भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है।” उन्होंने कहा कि उनके रेस्तरां को रोज कम से कम तीन सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है। पश्चिम बंगाल में, अधिकारियों ने कहा रसोई गैस सिलेंडर की कथित कमी का असर राज्य के कई स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना पर भी पड़ने लगा है। कुछ स्थानों पर लकड़ी जैसे वैकल्पिक ईंधन का सहारा लिया जा रहा है या छात्रों को सीमित खाद्य पदार्थ परोसे जा रहे हैं। असम पुलिस ने एलपीजी और अन्य ईंधनों की कमी की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

एक दिन पहले मुख्य सचिव ने कहा था कि राज्य की स्थानीय रिफाइनरी रसोई गैस की कुल मांग का केवल लगभग 30 प्रतिशत ही पूरा कर पाती हैं। सरकार ने अफवाहों, गलत सूचनाओं और भ्रामक खबरों पर नजर रखने के लिए एक मीडिया निगरानी समिति भी गठित की है। ईंधन की कमी के डर से लोग घबराकर खरीदारी कर रहे हैं और गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के आरोप लग रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी में पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में गैस एजेंसियों की सूची तैयार करने और एलपीजी आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्मियों की तैनाती करने का निर्देश दिया गया है।

एक अधिकारी ने कहा, “हमारा उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह की कालाबाजारी को रोकना है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लोगों को उचित वितरण प्रणाली के माध्यम से एलपीजी सिलेंडर मिलें।” कोलकाता में भी पुलिस ने एलपीजी सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। यह कदम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा अधिकारियों को ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश देने के एक दिन बाद उठाया गया। राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को एलपीजी की आपूर्ति और वितरण की समन्वित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की और आपूर्ति संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में चौबीसों घंटे संचालित होने वाले नियंत्रण कक्ष की स्थापना की घोषणा की।

एसओपी में कहा गया है, “यह प्रक्रिया समन्वित निगरानी को दिशा देने, आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने और जनता की शिकायतों के तत्काल निवारण को सुनिश्चित करने के लिए जारी की गई है।” इसके तहत नबन्ना में चौबीसों घंटे एलपीजी नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जाएगा, जो केंद्रीय समन्वय और निगरानी केंद्र के रूप में कार्य करेगा। राज्य सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय एलपीजी संकट निगरानी समिति का भी गठन किया है जो आपूर्ति की स्थिति की नियमित समीक्षा करेगी और पूरे राज्य में उपलब्धता को स्थिर रखने के लिए नीतिगत मार्गदर्शन देगी।

इस बीच, तेल विपणन कंपनियों की बुकिंग प्रणाली पर भी दबाव बढ़ गया है। वितरकों ने बताया कि रिफिल के लिए अचानक बढ़ी मांग के कारण कई बार सर्वर क्रैश हो रहे हैं। पश्चिम बंगाल में एलपीजी सिलेंडर की औसत दैनिक बुकिंग लगभग दोगुनी होकर करीब दो लाख हो गई है, जो पहले लगभग एक लाख थी। इंडियन एलपीजी वितरक संघ के प्रवक्ता बिजन विश्वास ने कहा, “लोग डर के मारे खरीदारी कर रहे हैं। कई लोगों को डर है कि उन्हें जल्द दूसरा सिलेंडर नहीं मिलेगा, और इसी वजह से यह स्थिति बनी है।”

तेलंगाना के नागरिक आपूर्ति मंत्री एन उत्तम कुमार रेड्डी ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य सरकार ने एलपीजी आपूर्ति की स्थिति का जायजा लेने और भविष्य के उपायों के लिए तेल विपणन कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक बुलाई है जिसमें मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव भी बैठक में उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में अभी तक कोई समस्या नहीं आई है।

उन्होंने कहा, “हम एलपीजी की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। तेलंगाना में घरेलू आपूर्ति 86 प्रतिशत और वाणिज्यिक आपूर्ति 14 प्रतिशत है। 86 प्रतिशत घरेलू आपूर्ति में अभी तक कोई समस्या नहीं है। वाणिज्यिक आपूर्ति को लेकर कुछ समस्याएं हमारे संज्ञान में आई हैं।” ओडिशा में, राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि एलपीजी, पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता कल्याण मंत्री के.सी. पात्रा ने कहा कि राज्य में एलपीजी और ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। हरियाणा में, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य में घरेलू एलपीजी सहित पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और चेतावनी दी कि अफवाहें फैलाने व कालाबाजारी में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजस्थान में, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि राज्य में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त भंडार है और उन्होंने उपभोक्ताओं से आपूर्ति को लेकर न घबराने की अपील की। गोदरा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से उत्पन्न मौजूदा स्थिति को देखते हुए सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की जमाखोरी, हेराफेरी या दुरुपयोग को रोकने के लिए सभी जिलों में सतर्कता दल गठित किए हैं।

केरल में, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि राज्य सरकार केरल में बढ़ते प्रवासी कामगारों की संख्या को देखते हुए गैर-घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आवंटन सीमा बढ़ाने के लिए केंद्र से अनुरोध करेगी। सरकार ने बताया कि वर्तमान में राज्य को आवंटित गैर-घरेलू गैस सिलेंडर की सीमा 20 प्रतिशत है। इसके अलावा, वाणिज्यिक और घरेलू उपयोग के लिए आवश्यक खाना पकाने के गैस सिलेंडरों की दैनिक खपत और वितरण की निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय निगरानी समिति गठित करने का भी निर्णय लिया गया। महाराष्ट्र में, राज्य सरकार ने कहा कि घरेलू और वाणिज्यिक सिलेंडरों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उसने नियंत्रण कक्ष और जिला स्तरीय समितियां गठित की हैं। देर शाम जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल दिग्गीकर ने अधिकारियों को सुचारू आपूर्ति बनाए रखने और राज्य भर में एलपीजी वितरण की बारीकी से निगरानी करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है। विभाग ने कहा कि महाराष्ट्र में घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं है और नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। खानपान और शादी समारोह आयोजन से जुड़ी सेवाएं भी इससे प्रभावित हुई हैं। पुडुचेरी के एक प्रमुख खानपान सेवा प्रदाता के प्रवक्ता ने बताया कि वे छोटे समारोहों के ऑर्डर नहीं ले रहे हैं क्योंकि पहले से बुक बड़े आयोजनों, खासकर शादियों के ऑर्डर पूरे करना प्राथमिकता बन गया है। दिल्ली में विवाह समारोहों के आयोजकों और कैटररों ने चेतावनी दी है कि यदि वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में बाधा और कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो शादी-समारोहों की खानपान लागत में लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। विवाह आयोजन कंपनी ‘विवाह लग्जरी वेडिंग्स’ के योजनाकार मोहसिन खान ने कहा, “शादियों और बड़े आयोजनों के लिए बड़े पैमाने पर खाना पकाने और कुकिंग स्टेशनों के लिए काफी संख्या में वाणिज्यिक सिलेंडर की जरूरत होती है। कई विक्रेताओं का कहना है कि उनके पास केवल दो से चार दिन का भंडार बचा है, इसलिए खाने की सामान्य सूची, खाना बनाने के कम विकल्प और ग्राहकों पर लगभग 10 से 15 प्रतिशत तक लागत बढ़ाने की चर्चा शुरू हो गई है।

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