By एकता | Apr 12, 2026
केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल 2026 तक संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है। इस सत्र की महत्ता को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को 'तीन लाइन का व्हिप' जारी किया है। इसके तहत सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को इन तीन दिनों के दौरान सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव है। बढ़ी हुई सीटों में से करीब 273 सीटें (कुल सीटों का एक-तिहाई) महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं। आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए सरकार 2027 की जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कराने की योजना बना रही है।
पार्टी ने अपने सांसदों को भेजे संदेश में स्पष्ट किया है कि सत्र के दौरान किसी को भी अवकाश नहीं दिया जाएगा। सांसदों से व्हिप का सख्ती से पालन करने और चर्चा के दौरान सदन में डटे रहने को कहा गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन प्रस्तावों को पहले ही मंजूरी दे दी है, और अब इन्हें कानून का रूप देने के लिए संसद में पेश किया जाएगा।
दूसरी ओर, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस सत्र से पहले 'सर्वदलीय बैठक' बुलाने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने बिना विश्वास में लिए यह सत्र बुलाया है। सांसद शशि थरूर ने भी चिंता जताई है कि बिना उचित विचार-विमर्श के परिसीमन जैसे बड़े कदम उठाने से राज्यों के लोकतांत्रिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार इस ऐतिहासिक कानून को 2029 तक धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रही है।