Supreme Court से राहत के बाद Pawan Khera का Delhi में भव्य स्वागत, बोले- संविधान जीता, दमनकारी मशीनरी हारी

By एकता | May 03, 2026

सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का दिल्ली में भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने संविधान और न्यायपालिका के प्रति अपना अटूट विश्वास दोहराया। यह पूरा मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी से जुड़े कथित मानहानि और जालसाजी के आरोपों से संबंधित है, जिसमें कोर्ट ने खेड़ा को बड़ी राहत दी है।

दिल्ली में पवन खेड़ा का जोरदार स्वागत

अग्रिम जमानत मिलने के बाद जब पवन खेड़ा दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, तो वहां बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। जयराम रमेश समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने इस फैसले को 'संविधान की जीत' बताया। खेड़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि जब भी सरकार अपनी मशीनरी का गलत इस्तेमाल कर किसी नागरिक के अधिकारों को दबाने की कोशिश करती है, तब बाबा साहब का बनाया संविधान ही रक्षा कवच बनकर सामने आता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में यह मामला 'राजनीति से प्रेरित' और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रभावित लगता है। अदालत ने माना कि इस मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस फैसले को भी त्रुटिपूर्ण बताया, जिसमें खेड़ा की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

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किन शर्तों पर मिली जमानत?

सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करने के निर्देश दिए हैं। जमानत की मुख्य शर्तों में, पुलिस जब भी बुलाएगी, उन्हें जांच के लिए पेश होना होगा। वे गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करेंगे और बिना अदालत की अनुमति के वे देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेंगे, शामिल हैं।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला पवन खेड़ा द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर मानहानि और जालसाजी की। हालांकि, पवन खेड़ा ने कहा कि यह फैसला सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि देश के उन सभी लोगों के लिए संदेश है जो दमनकारी कदमों के खिलाफ खड़े हैं।

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