Vivek Vihar Fire Tragedy: सुरक्षा ही बनी 9 लोगों का काल, ग्रिल और बंद ताले ने बनाया इमारत को मौत का चैंबर

Vivek Vihar Fire Tragedy
ANI
एकता । May 3 2026 3:56PM

दिल्ली के विवेक विहार में हुए भीषण अग्निकांड में दो परिवारों के 9 लोगों की दम घुटने से मौत हो गई, जिसमें सुरक्षा के लिए लगाई गई ग्रिल और छत का बंद ताला ही काल बन गया। यह हादसा इमारत के असुरक्षित डिजाइन और इमरजेंसी एग्जिट न होने के कारण हुआ, जिससे आग लगने पर लोगों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला।

दिल्ली के विवेक विहार इलाके में रविवार तड़के हुए अग्निकांड ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। इमारत में सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की ग्रिल और छत पर लगा ताला मासूम जिंदगियों के लिए काल बन गया। इस दर्दनाक हादसे में दो परिवारों के नौ लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक छोटा बच्चा भी शामिल है।

मौत का जाल बनी इमारत की बनावट

बचाव कार्य में जुटी टीमों के मुताबिक, इमारत का डिजाइन ही लोगों की मौत का सबसे बड़ा कारण बना। बेसमेंट के साथ बनी इस चार मंजिला इमारत में बाहर निकलने के लिए सिर्फ एक ही सीढ़ी थी और कोई 'इमरजेंसी एग्जिट' नहीं था। जैसे ही आग फैली, पिछले हिस्से में रहने वाले लोग लोहे की ग्रिल की वजह से बाहर नहीं कूद सके। वहीं, जो लोग जान बचाने के लिए भागकर छत पर पहुंचे, उन्हें वहां ताला लटका मिला।

 

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सो रहे थे लोग, तभी हुआ धमाका

हादसा सुबह करीब 3:30 बजे हुआ, जब सभी गहरी नींद में थे। चश्मदीदों के अनुसार, एक एसी के फटने से जोरदार धमाका हुआ और आग तेजी से पूरी बिल्डिंग में फैल गई। पास की इमारतों के बीच जगह न होने के कारण आग दूसरी बिल्डिंग तक भी पहुंच गई। मदद के लिए चीख-पुकार मच गई और डर के मारे दो बच्चों ने तो सामने की ओर से कूदने तक की कोशिश की।

दो परिवारों ने खोए अपने सदस्य

दमकल विभाग को एक शव पहली मंजिल से, पांच शव दूसरी मंजिल से और तीन शव सीढ़ियों के पास से मिले। मृतकों में अरविंद जैन (60), उनकी पत्नी, बेटा, बहू और पोता शामिल हैं। वहीं, एक अन्य परिवार के नितिन जैन (50), उनकी पत्नी और बेटे की भी इस हादसे में जान चली गई। पहली मंजिल पर रहने वाली शिखा जैन की भी मौत हो गई, जबकि उनके पति घायल हैं।

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सुरक्षा मानकों की अनदेखी

पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मामले की जांच कर रही हैं। यह साफ हो गया है कि गर्मी और धुएं के कारण ज्यादातर लोगों की मौत दम घुटने से हुई। इमारत में धुआं निकलने की कोई जगह नहीं थी और सुरक्षा के लिए बंद किए गए रास्तों ने लोगों को भागने का मौका ही नहीं दिया।

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