By अंकित सिंह | Jul 18, 2026
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के लिए ऐसे विरोध प्रदर्शन में भाग लेना उचित नहीं होगा जिसका एकमात्र उद्देश्य राज्य की मांग हो। इसी के मद्देनजर उन्होंने जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस का निमंत्रण अस्वीकार कर दिया। मुफ्ती ने कहा कि एक ईमानदार और सार्थक राजनीतिक प्रक्रिया तभी शुरू हो सकती है जब मूलभूत मुद्दों का समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा कि सिर्फ़ राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए एकजुट होकर विरोध करना, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के गैर-कानूनी कदम को सही ठहराने और उसे जायज़ बनाने जैसा होगा। इसे हमारे सामूहिक इतिहास के सबसे काले दिन—5 अगस्त—के सीधे समर्थन के तौर पर भी देखा जा सकता है। मुफ़्ती ने स्पेशल स्टेटस पर ध्यान दिए बिना राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को दिखावटी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह आधी-अधूरी मांग न सिर्फ़ अनुच्छेद 370 को हाशिए पर धकेलने के BJP के बुरे नैरेटिव को दोहराती और उसे सही ठहराती है, बल्कि इससे 5 अगस्त, 2019 को चुपके से किए गए गैर-कानूनी और असंवैधानिक आत्मघाती कदम पर पर्दा पड़ने का भी खतरा है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन, यानी 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर धरना देने की योजना बना रही है। इस विरोध प्रदर्शन में नेशनल कॉन्फ्रेंस के सभी विधायक और सांसद हिस्सा लेंगे। हालांकि, NC सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने कहा कि उन्हें इसमें शामिल होने का न्योता नहीं मिला है और वह ऐसे किसी विरोध प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनेंगे जिसमें अनुच्छेद 370 की बहाली से कमतर किसी चीज़ की मांग की जा रही हो। जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को जज़्बाती मुद्दा बताते हुए मुफ़्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर 5 अगस्त, 2019 के संवैधानिक बदलावों को सामान्य दिखाने का आरोप लगाया।
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