Peace या Piece? एलन मस्क ने दावोस में उड़ाया ट्रंप के ड्रीम प्रोजेक्ट का मजाक, ठहाकों से गूंजा WEF

By अभिनय आकाश | Jan 24, 2026

दावोस में वर्ल्ड इकोनमिक फोरम यानी डब्ल्यूईएफ की बैठक चल रही थी। करीब 20 देशों के नेता दुनिया के सबसे बड़े कॉर्पोरेट्स और ग्लोबल पावर सेंटर्स मौजूद थे। इसी मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए अंतरराष्ट्रीय मंच का ऐलान किया बोर्ड ऑफ पीस का। ट्रंप के मुताबिक इस बोर्ड का मकसद होगा दुनिया में शांति स्थापित करना। संघर्षों को रोकना और कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना। कागजों में यह ऐलान जितना गंभीर था उतना ही मजाक में बदल गया जब माइक एलन मस्क को मिला। दावोस में ही ब्लैक रॉक के सीईओ लेरी फिंग के साथ एक पैनल डिस्कशन के दौरान एलन मस्क से ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस पर सवाल पूछा गया और फिर मस्क ने मुस्कुराते हुए शब्दों से खेला। यह ट्रंप की नीतियों पर सीधा सटीक और सार्वजनिक हमला था। मस्क का इशारा साफ था। डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल से ही ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं। उन्होंने इसे अमेरिका की स्ट्रेटजी जरूरत बताया था। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने इस प्रस्ताव को सीधे-सीधे खारिज कर दिया।

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ट्रंप का रवैया हमेशा आक्रामक रहा। आर्कटिक पर अमेरिकी पकड़, मिनरल्स, मिलिट्री पोजीशनिंग। यही वजह है कि जब ट्रंप बोर्ड ऑफ पीस की बात कर रहे हैं तो मस्क जैसे लोग पूछते हैं शांति या फिर जमीन का टुकड़ा। अब मस्क ने वेनेजुएला का नाम भी यूं नहीं लिया। डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के खुले समर्थक रहे हैं। माद्रो सरकार पर प्रतिबंध, विपक्ष को समर्थन, तेल और संसाधनों में अमेरिकी दखल। मस्क का व्यंग यह था कि जहां ट्रंप की विदेश नीति रिजीम चेंज और टेरिटोरियल इंटरेस्ट से जुड़ी रही हो, वह अचानक शांति का बोर्ड बनाए, तो सवाल तो उठना लाजमी है। यह सिर्फ एक चुटकुला नहीं था। यह इशारा था ग्लोबल एलट बिजनेस लीडर्स, टेक इंडस्ट्री और अब ट्रंप की वैश्विक नीतियों को सवालों के घेरे में रख रहे हैं। जब दुनिया युद्ध, यूक्रेन, गाजा, चीन, अमेरिका तनाव से जूझ रही हो और उसी वक्त शांति के नाम पर जमीन और सत्ता की बात हो तो भरोसा डगमगाता है।

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अब असली सवाल है कि क्या बोर्ड ऑफ पीस वाकई शांति के लिए है या फिर यह कूटनीतिक दबाव, अमेरिकी हित और ग्लोबल नैरेटिव कंट्रोल का नया तरीका है। तो एलन मस्क ने बिना लंबा भाषण दिए बस एक लाइन में ही पूरी बहस छेड़ दी। खैर दाऊस का मंच अक्सर गंभीर घोषणाओं के लिए जाना जाता है। लेकिन इस बार एक मजाक ने पूरी पॉलिटिक्स खोल दी। पीस या फिर पीस? यह सवाल अब सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है बल्कि अमेरिका की वैश्विक सोच पर सबसे बड़ा सवाल बन गया है। 

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