जिसे पागलों की तरह डरा रहा चीन, वो अचानक मोदी से मिलने आया!

By अभिनय आकाश | Jun 03, 2026

चीन ने जिस व्यक्ति को दुनिया से दूर रखने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है, वही व्यक्ति पीएम मोदी से मिलने पहुंच गया। इस व्यक्ति के पास वो खजाना है जिसे पाने के लिए दुनिया की महाशक्तियां पागल हैं। इसीलिए चीन नहीं चाहता कि यह व्यक्ति दुनिया के किसी नेता से मिले। लेकिन अब यह पीएम मोदी के साथ खड़े हैं। पीएम मोदी ने एक बहुत बड़ा दांव खेल दिया है। यह हैं म्यांमार के राष्ट्रपति मिन ओंग हलाइन। यह छोटा सा देश चीन को आधा निगल सकता है। अब इसी खेल में भारत जुट गया है। बता दें कि मिनोंग हलाइंग एक पेशेवर सैन्य कमांडर हैं जो 2011 में म्यांमार की आर्मी के चीफ रह चुके हैं। उन्होंने फरवरी 2021 में एक सैन्य तख्ता पलट के जरिए सत्ता पर कब्जा कर लिया था तभी से वह म्यांमार पर शासन कर रहे हैं। अप्रैल 2026 में संसद द्वारा उन्हें राष्ट्रपति चुन लिया गया। 2021 से म्यांमार गृह युद्ध से गुजर रहा है। म्यांमार के अलग-अलग इलाकों में जातीय उग्रवादी संगठन मिनंग हाइंग के खिलाफ खड़े हो गए हैं। इन उग्रवादी संगठनों को चीन हथियार देता है ताकि चीन मिनंग हयांग पर दबाव बनाए रखे। चीन मिनऑंग हयांग पर दबाव इसलिए बनाना चाहता है क्योंकि म्यांमार के पास दुनिया के हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है। इन एलिमेंट्स का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, विंड, टरबाइन, फाइटर, जेट्स और स्मार्टफोन जैसी चीजों में होता है। 

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भारत म्यांमार के साथ 1643 कि.मी. लंबा बॉर्डर शेयर करता है। म्यांमार में जो गृह युद्ध चल रहा है उसका फायदा चीन और अमेरिका लगातार उठाते हैं। म्यांमार के जरिए ही चीन मणिपुर को जला रहा है और म्यांमार में ही अमेरिकी एजेंट मैथ्यू वेंडाइक आतंकियों को ट्रेनिंग दे रहा था। यह वही सीआईए एजेंट है जिसे भारत ने हाल ही में गिरफ्तार किया था। भारत और म्यांमार की सरकार के बीच अगर रिश्ते और भी ज्यादा मजबूत हो गए तो इन उग्रवादी संगठनों को खत्म किया जा सकता है। म्यांमार पर भारत की निर्भरता का दूसरा सबसे बड़ा कारण रेयर अर्थ एलिमेंट्स ही है। हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि म्यांमार के पास दुनिया के रेयर अर्थ एलिमेंट्स के तीसरे सबसे बड़े भंडार मौजूद हैं। रेयर अर्थ एलिमेंट्स भारत की सबसे बड़ी जरूरत है। म्यांमार पर भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्भरता है कनेक्टिविटी। भारत म्यांमार के रास्ते थाईलैंड तक एक 1360 कि.मी. का हाईवे बना रहा है जो पिछले कई सालों से अटका है। इस हाईवे का काम पूरा हो गया तो भारत चीन के नजदीक तक पहुंच सकता है। इस हाईवे के अलावा भारत कलादान मल्टी मॉडल प्रोजेक्ट भी बना रहा है। जो पूर्वोत्तर भारत को म्यांमार के रास्ते सितवे बंदरगाह से जोड़ता है।

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