By अंकित सिंह | May 12, 2022
विश्व धरोहर ताजमहल में सर्वे की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए कहा कि हम ऐसे याचिकाओं पर विचार नहीं कर सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने से भी इंकार कर दिया। कोर्ट ने साफ तौर पर कह दिया कि आज का यह मुद्दों के आधार पर नहीं है। आपकों बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के समक्ष ताजमहल के 22 बंद दरवाजों को खोलने की मांग वाली याचिका दाखिल की गई थी। दूसरी ओर याचिका पक्ष का कहना है कि वह इस सम्मान को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
इससे पहले अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से दूर रहने की वजह से ताजमहल के इतिहास के बारे में तथ्यान्वेषी जांच के अनुरोध वाली याचिका पर मंगलवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई नहीं हो सकी थी। याचिका में ताजमहल के इतिहास और इसके 22 कमरों को खोलने के बारे में तथ्यान्वेषी जांच का अनुरोध किया गया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में सात मई को एक रिट याचिका दायर कर ताजमहल के इतिहास के सच को सामने लाने के मकसद से तथ्यान्वेषी जांच के लिए एक कमेटी के गठन का अनुरोध किया गया। याचिका में 1951 और 1958 में बने उन कानूनों को संविधान के प्रावधानों के विरुद्ध घोषित करने का अनुरोध किया गया है, जिनके तहत ताजमहल, फतेहपुर सीकरी का किला और आगरा के लाल किले आदि इमारतों को ऐतिहासिक इमारत घोषित किया गया था।