By अभिनय आकाश | Aug 21, 2026
सोमालिया के समुद्री इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने भारत सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। दरअसल यहां हथियारों और सैन्य संचार से जुड़े उपकरणों से भरे एक कारगो शिप को समुद्री लुटेरों ने लूट लिया। भारत के लिए यह परेशानी वाली खबर इसलिए भी है क्योंकि शिप पर 10 क्रू मेंबर मौजूद थे। जिनमें से छह भारतीय नागरिक हैं। जानकारी है कि समुद्री लुटेरों ने इस जहाज को सभी क्रू मेंबर समेत हाईजैक कर लिया। अब सवाल यह है कि इन समुद्री लुटेरों ने जहाज को कब्जे में क्यों और कैसे लिया और यह हथियार आखिर कहां जा रहे थे? और फिलहाल इस जहाज और क्रू मेंबर्स का क्या हुआ? इस खबर ने तुर्की और सोमालिया दोनों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। क्योंकि सोमालिया के समुद्री मार्गों से अगर हथियारों की इतनी बड़ी खेप जा रही थी तो समुद्र में इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी? बता दें कि जिस जहाज को समुद्री लुटेरों ने हाईजैक किया वो कैमरून फ्लैग्ड एमवी लुटुफ था। इस जहाज पर कोई तुर्की का झंडा नहीं लगा था। यह जहाज सिर्फ तुर्की के हथियार और संचार सेटेलाइट उपकरण लेकर जा रहा था। जिन्हें मोगाद दिशू स्थित तुर्की के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचाना था। लेकिन उससे पहले ही 20 अगस्त को आईल जिले के मराया इलाके से करीब 3.5 नॉटिकल मील दूर सोमालिया के पुंट लैंड तट के पास समुद्री लुटेरों ने इसे हाईजैक कर लिया। बताया जा रहा है कि जहाज को हाईजैक करने वाले समुद्री लुटेरों की संख्या करीब आठ थी। जो जहाज को सोमालिया के नुगाल इलाके की तरफ ले गए। सोमालिया अधिकारी के मुताबिक इस हाईजैक के बाद टेंशन इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इस जहाज में तुर्की के हथियार लदे थे।
मंगलवार को एक अस्पताल के अधिकारी ने बताया कि दक्षिण-पश्चिमी शहर बैदोआ में सोमाली सरकारी बलों और मिलिशिया के बीच घंटों तक चली ज़बरदस्त लड़ाई में कम से कम चार आम नागरिक मारे गए और 98 अन्य घायल हो गए। यह झड़प सोमवार तड़के शुरू हुई जब मिलिशिया समूहों ने शहर के बाहरी इलाकों में सरकारी ठिकानों पर हमला किया। इस शहर में संघर्ष और सूखे के कारण विस्थापित हुए पाँच लाख से ज़्यादा लोग रहते हैं। सोमाली अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 30 मिलिशिया लड़ाके मारे गए, लेकिन उन्होंने सरकारी बलों के हताहत होने वालों की संख्या तुरंत नहीं बताई। बे रीजनल हॉस्पिटल के इमरजेंसी विभाग के प्रमुख डॉ. अब्दिकाफ़ी उमर मोहम्मद ने बताया कि मारे गए या घायल हुए आम नागरिकों में 28 महिलाएँ और एक बुज़ुर्ग व्यक्ति शामिल था, जिसे भटकती हुई गोलियाँ लगी थीं। ताज़ा हिंसा ने बैदोआ की पहले से ही दबाव झेल रही स्वास्थ्य सेवाओं पर और बोझ डाल दिया है। मोगादिशू से लगभग 245 किलोमीटर (150 मील) उत्तर-पश्चिम में स्थित इस शहर में स्थानीय आबादी के अलावा बड़ी संख्या में विस्थापित लोग भी रहते हैं।