By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 07, 2026
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता पहलवान सुजीत कलकल ने बुधवार को बताया कि वह आक्रामक दांव-पेंच के साथ अपने ‘ग्राउंड गेम’ पर विशेष रूप से काम कर रहे हैं। सुजीत ने कहा कि कोच का मानना है कि अगर वह मैट पर गिरने के बाद प्रतिद्वंद्वी को पकड़कर अंक हासिल करने वाले दांव-पेंच और तकनीक (ग्राउंड अटैक) में भी मजबूत हो जाते हैं तो उनकी पहले से आक्रामक कुश्ती और ज्यादा प्रभावी हो जाएगी और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में उन्हें इसका फायदा मिलेगा। सुजीत ने एशियाड में अपने पदार्पण में पुरुषों के 65 किग्रा फ्रीस्टाइल में स्वर्ण पदक जीता।
’’ हरियाणा के इस पहलवान की एशियाई खेलों में सफलता कहीं अधिक आक्रामक रवैये पर आधारित थी जिसके बारे में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फ्रीस्टाइल कोच एमजारियोस ‘शाको’ बेंटिनिडिस ने उनके साथ विशेष रूप से काम किया था। कोच ने उन्हें यह अहसास तब कराया जब वह रूस में एक प्रतियोगिता जीतने के बावजूद वह पर्याप्त हमला नहीं कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने सोचा कि अगर मुझमें आक्रामकता तो मुझे ऐसा करना चाहिए।
इस मैच में मैंने हर मुकाबले में आक्रामक रूख अपनाया और अंक बनाए। ’’ सुजीत ने अब अपना लक्ष्य ओलंपिक चैंपियन बनने पर केंद्रित कर लिया है। उन्होंने कहा कि पेरिस ओलंपिक में जगह नहीं बना पाने की निराशा अब पीछे छूट चुकी है और वह 2028 खेलों की तैयारी करते हुए वर्तमान और भविष्य पर ध्यान देंगे।
सुजीत ने कहा, ‘‘ओलंपिक हर खिलाड़ी का सपना होता है। ओलंपिक चैंपियन बनना, अपने देश के झंडे को शीर्ष पर रखना। इसलिए, अगर हम ओलंपिक की तैयारी कर रहे हैं, तो स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करें।
’’ तेईस वर्षीय पहलवान पेरिस ओलंपिक से चूक गया था क्योंकि भारत उनके वर्ग में कोटा हासिल करने में विफल रहा था। पहलवान ने याद किया कि बाढ़ सहित परिस्थितियां उनके नियंत्रण से बाहर थीं जिनके कारण वह क्वालीफिकेशन प्रतियोगिता तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने कहा, ‘‘पेरिस में जो हुआ, वह भगवान की इच्छा थी।
हम इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते। हम पूरी कोशिश करेंगे कि अतीत पर ज्यादा ध्यान नहीं दें। हम अपने वर्तमान और भविष्य पर ध्यान देंगे।
’’ इन झटकों के बाद सुजीत की एशियाई खेलों की जीत विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि नागोया में उनका रवैया आखिरी सेकेंड तक लड़ते रहने का था, खासकर फाइनल में 2-9 से पिछड़ने के बाद। उन्होंने कहा, ‘‘अगर मैं हार रहा हूं, तो आखिरी सांस तक लड़ना मेरा कर्तव्य है।
हमारे अंदर जितनी भी ताकत बची है, मैं अपना सब कुछ लगा दूंगा।