By अभिनय आकाश | May 18, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूएई के दौरे को खत्म करके आगे के विदेश दौरे के लिए वहां से आगे निकले ही थे कि इतने ही देर में यूएई में एक अटैक की घटना सामने आ गई है और यह अटैक हुआ है वहां के इकलौते न्यूक्लियर पावर प्लांट बराका न्यूक्लियर फैसिलिटी में आपको बता दें कि ये अरब देश का पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट है जिसे दक्षिण कोरिया की मदद से तैयार किया गया है और इस पर एक ड्रोन अटैक सामने आया है। यह एक बड़ी घटना है। दरअसल यूएई के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 17 मई 2026 को पश्चिमी दिशा से तीन यूएवी ड्रोन यूएई की सीमा में दाखिल हुए। यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने तुरंत इस पर कारवाई करते हुए एक्शन शुरू किया और इन तीन में से दो ड्रोंस को उन्होंने न्यूट्रलाइज कर दिया। लेकिन एक ड्रोन जो था वो अलदफरा के इलाके में जाकर इसी बराका न्यूक्लियो फैसिलिटी के पास के इलाके में बाहर स्थित एक जनरेटर पर जा गिरा। जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। यह ड्रोन एक इलेक्ट्रिक जनरेटर से जाकर टकराया जिसके बाद वहां पर आग लग गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि आग पर तुरंत काबू पा लिया गया और न्यूक्लियर सिस्टम पर इसका कोई भी असर नहीं पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। IAEA ने एक बयान में कहा है कि परमाणु सुरक्षा को खतरे में डालने वाली सैन्य गतिविधियां किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। आईएईए वही संस्थान है यानी कि इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी जो कि न्यूक्लियर रिएक्टर और न्यूक्लियर फैसिलिटीज पर बयान देती है। उन्होंने एक्सपर्ट पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि न्यूक्लियर प्लांट पूरी तरीके से सुरक्षित है और रेडिएशन का कोई भी खतरा नहीं है। एजेंसी के मुताबिक ड्रोन हमले से प्लांट के अंदर नहीं बल्कि बाहरी हिस्से में मौजूद एक बिजली जनरेटर में आग लगी थी। फिलहाल यूनिट थ्री को बिजली देने के लिए इमरजेंसी डीजल जनरेटर का इस्तेमाल किया जा रहा है और आईएए के डायरेक्टर जनरल राफेल गरोसी ने इस घटना पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास सैन्य गतिविधि या हमला बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसी घटनाएं बड़े परमाणु हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए न्यूक्लियर साइट्स के आसपास अधिकतम सैन्य संयम बरतना चाहिए। ऐसा संदेश उन्होंने सबको दिया है।