सिविल सेवा दिवस पर पीएम मोदी बोले- हमारी मुख्य जिम्मेदारी है देश की एकता और अखंडता

By अंकित सिंह | Apr 21, 2022

सिविल सेवा दिवस पर लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर मोदी ने कहा कि सिविल सेवा दिवस पर आप सभी कर्मयोगियों को बहुत बहुत शुभकामनाएं। आज जिन साथियों को ये अवार्ड मिले हैं, उनको, उनकी पूरी टीम को और उस राज्य को भी मेरी तरफ से बहुत बहुत बधाई। उन्हेंने कहा कि आप जैसे साथियों से इस प्रकार से संवाद मैं लगभग 20-22 साल से कर रहा हूं। पहले मुख्यमंत्री के रूप में करता था और अब प्रधानमंत्री के रूप में कर रहा हूं। उसके कारण एक प्रकार से कुछ मैं आपसे सीखता हूं और कुछ अपनी बातें आप तक पहुंचा पाता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार का आयोजन रूटीन प्रक्रिया नहीं है, मैं इसे विशेष समझता हूं। विशेष इसलिए क्योंकि आजादी के अमृत महोत्सव में जब देश आजादी के 75 साल मना रहा है, तब हम इस समारोह को कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं चाहूंगा कि आजादी के इस अमृत काल में आप अपने डिस्ट्रिक्ट में जो पहले कलेक्टर के रूप में काम करके गए हैं, एक बार अगर हो सके तो उनका मिलने का कार्यक्रम बनाइये। आपके पूरे जिले के लिए वो एक नया अनुभव होगा। इसी तरह राज्यों में जो चीफ सेक्रेटरी के रूप में कार्य करके गए हैं, एक बार राज्य के मुख्यमंत्री उन सबकों बुला लें। देश के प्रधानमंत्री, जितने भी कैबिनेट सेक्रेटरी रहे हैं उनकों बुला लें। मोदी ने कहा कि आजादी के अमृत काल, 75 साल की इस यात्रा में भारत को आगे बढ़ाने में सरदार पटेल का सिविल सर्विस का जो तोहफा है। इसके जो ध्वजवाहक लोग रहे हैं, उन्होंने इस देश की प्रगति में कुछ न कुछ योगदान दिया ही है। उनकों सबकों स्मरण करना, उनका सम्मान करना, ये भी आजादी के अमृत काल में सिविल सर्विस को ऑनर करने वाला विषय बन जायेगा।

इसे भी पढ़ें: ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉनसन भारत पहुंचे, अहमदाबाद में भव्य स्वागत, साबरमती आश्रम पहुंचे

मोदी ने कहा कि भारत की संस्कृति की ये विशेषता है कि हमारा देश राज्य व्यवस्थाओं से नहीं बना है। हमारा देश राजसिंहासनों की बपौती नहीं रहा है। ये देश सदियों से, हजारों वर्ष के लंबे कालखण्ड से हमारी जो परंपरा रही है, वो जनसामान्य के सामर्थ्य को लेकर चलने की परंपरा रही है। गवर्नेंस में रिफार्म एक नित्य और सहज प्रक्रिया एवं प्रयोगशील व्यवस्था होनी चाहिए। अगर प्रयोग सफल नहीं हुआ, तो छोड़ते हुए चले जाने का साहस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में सैंकड़ों कानून ऐसे थे, जो देश के नागरिकों के लिए बोझ बन गए थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले 5 साल में मैंने 1,500 ऐसे कानून खत्म किये थे। उन्होंने कहा कि बीते 8 साल के दौरान देश में अनेक बड़े काम हुए। इनमें से अनेक अभियान ऐसे हैं जिनके मूल में behavioural change हैं। ये कठिन काम होता है और राजनेता तो कभी इसमें हाथ लगाने की हिम्मत ही नहीं करता।

प्रमुख खबरें

US-Iran के बीच New Deal की पेशकश, क्या प्रतिबंधों के बदले परमाणु कार्यक्रम रोकेगा तेहरान?

Tamil Nadu में सियासी गतिरोध खत्म! Vijay कल ले सकते हैं शपथ, राज्यपाल से मिल सरकार बनाने का दावा किया पेश

BJP पूंजीवाद को देती है बढ़ावा , Akhilesh Yadav का सरकार पर हमला, बोले- जल्द बढ़ेंगे Petrol-Diesel के दाम

इस बार हमारी सरकार (व्यंग्य)