By नीरज कुमार दुबे | Jun 29, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में केवल एक सहभागी शक्ति नहीं, बल्कि स्थिरता, सुरक्षा और विकास का सबसे भरोसेमंद केंद्र बन चुका है। सेशेल्स की स्वतंत्रता की पचासवीं वर्षगांठ और दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के पचास वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई यह यात्रा सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच नौ महत्वपूर्ण समझौते हुए। इनमें प्रत्यर्पण संधि सबसे अधिक सामरिक महत्व रखती है। हिंद महासागर क्षेत्र लंबे समय से समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध मछली पकड़ने और अंतरराष्ट्रीय अपराधों की चुनौती से जूझता रहा है। ऐसे में प्रत्यर्पण समझौता और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत की सुरक्षा नीति को मजबूत करने वाला कदम है। इससे भारत को पश्चिमी हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक उपस्थिति और निगरानी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट कहा कि भारत और सेशेल्स की सुरक्षा एक दूसरे से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि भारत ने सेशेल्स को तेज गश्ती पोत, नौकाएं, एंबुलेंस और अन्य उपयोगी वाहन भेंट किए। भारतीय नौसेना के युद्धपोत और सर्वेक्षण पोत का सेशेल्स पहुंचना हिंद महासागर में भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का प्रदर्शन भी था।
साथ ही भारत ने सेशेल्स के लिए एक सौ पचहत्तर मिलियन डॉलर के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर यह भी दिखाया कि उसकी विदेश नीति केवल रणनीतिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि विकास आधारित साझेदारी पर आधारित है। सामाजिक आवास, शिक्षा, परिवहन, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भारत का सहयोग यह दर्शाता है कि नई दिल्ली अपने साझेदार देशों के विकास को अपनी प्राथमिकता मानती है। मोदी सरकार की यही नीति भारत को अन्य वैश्विक शक्तियों से अलग पहचान देती है।
इस यात्रा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष डिजिटल और आर्थिक सहयोग भी रहा। भारत और सेशेल्स के बीच स्थानीय मुद्रा में व्यापार, प्रत्यक्ष नौवहन संपर्क और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर हुए समझौते भविष्य की आर्थिक संरचना को बदलने वाले कदम हैं। भारत की डिजिटल सार्वजनिक संरचना को सेशेल्स में लागू करने की पहल यह साबित करती है कि भारत अब तकनीकी समाधान देने वाली वैश्विक शक्ति के रूप में उभर चुका है। यह मोदी सरकार की उस नीति का परिणाम है जिसमें तकनीक को जनकल्याण और वैश्विक साझेदारी का आधार बनाया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन और छोटे द्वीपीय देशों की चुनौतियों को जिस मजबूती से उठाया, वह भी भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने साफ कहा कि जिन देशों ने जलवायु संकट पैदा नहीं किया, उन्हें उसका सबसे बड़ा बोझ नहीं उठाना चाहिए। यह बयान विकसित देशों की दोहरी नीतियों पर सीधा प्रहार भी था। भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी आधारभूत ढांचा गठबंधन और हरित ऊर्जा अभियानों के माध्यम से पहले ही विश्व मंच पर अपनी अलग पहचान बना ली है। सेशेल्स द्वारा भारत की पहल में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि विकासशील देशों के बीच भारत की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है।
साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स द्वारा दिया गया “ब्लू होराइजन के संरक्षक” सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक है। यह सम्मान पहली बार किसी नेता को दिया गया और इससे यह संदेश गया कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत को एक जिम्मेदार और भरोसेमंद शक्ति के रूप में देखता है। पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और समुद्री संसाधनों के संतुलित उपयोग को लेकर भारत की प्रतिबद्धता ने छोटे द्वीपीय देशों में विश्वास पैदा किया है।
सामरिक दृष्टि से देखें तो यह यात्रा चीन की बढ़ती समुद्री सक्रियता के बीच भारत की मजबूत जवाबी रणनीति का हिस्सा भी है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन लगातार बंदरगाह, आधारभूत ढांचे और कर्ज आधारित परियोजनाओं के जरिए प्रभाव बढ़ाने में लगा है। इसके मुकाबले भारत ने सहयोग, विश्वास और साझा विकास का मॉडल प्रस्तुत किया है। यही कारण है कि सेशेल्स जैसे देश भारत को केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक साझेदार मानते हैं। मोदी सरकार की विदेश नीति ने पिछले एक दशक में हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की स्थिति को अभूतपूर्व मजबूती दी है।
साथ ही सेशेल्स की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती पर भारतीय सेना और नौसेना की ऐतिहासिक भागीदारी ने इसे भारत की सामरिक शक्ति और क्षेत्रीय प्रभाव के प्रदर्शन में बदल दिया। असम रेजिमेंट के जवानों, भारतीय नौसेना के बैंड और युद्धपोतों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत सुरक्षा का सबसे विश्वसनीय स्तंभ है। राजधानी विक्टोरिया में जब भारतीय सैनिकों ने कदमताल की और असम रेजिमेंट का प्रसिद्ध युद्धगान गूंजा, तब वह केवल सैन्य प्रदर्शन नहीं था, बल्कि भारत और सेशेल्स के बीच दशकों पुराने भरोसे और रक्षा सहयोग का जीवंत प्रतीक था। युद्धपोत आईएनएस तरकश और आईएनएस इक्षाक की उपस्थिति ने हिंद महासागर में भारत की समुद्री क्षमता और रणनीतिक पहुंच को और अधिक प्रभावशाली ढंग से स्थापित किया। यह संदेश भी साफ था कि मोदी सरकार हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सैन्य और सामरिक उपस्थिति को नई ऊंचाई देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बहरहाल, कुल मिलाकर देखें तो प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले समय में हिंद महासागर की राजनीति और अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका निर्णायक होने जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा ने यह साबित कर दिया कि मोदी सरकार की विदेश नीति दूरदर्शी, संतुलित और रणनीतिक रूप से अत्यंत प्रभावी है। हिंद महासागर में भारत की बढ़ती उपस्थिति केवल सामरिक शक्ति का विस्तार नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और साझी समृद्धि की नई कहानी है।
-नीरज कुमार दुबे