मोदी और अमित शाह को चुनावों में भारी पड़ सकता है अति-आत्मविश्वास

By बद्रीनाथ वर्मा | Sep 18, 2018

देश की जनता का तो पता नहीं परंतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पूरी भाजपा बागबाग है। प्रधानमंत्री को अगले लोकसभा चुनाव में जहां कोई चुनौती नजर नहीं आती वहीं भाजपाध्यक्ष अमित शाह का दावा है कि 2019 की जीत के बाद अगले 50 वर्षों तक भाजपा को कोई हरा नहीं पायेगा। अब इन दावों में कितना दम है यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा लेकिन डर है कि कहीं अटल बिहारी वाजपेयी की तरह ही शाइनिंग इंडिया और फील गुड का सा हश्र न हो जाये।

विपक्ष के महागठबंधन की अवधारणा को लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग एक दूसरे को देख नहीं सकते, एक साथ चल नहीं सकते, आज वो गले लगने को मजबूर हैं। उनकी यही मजबूरी हमारी सफलता है क्योंकि पार्टी की लोकप्रियता बढ़ी है और काम की स्वीकार्यता बढ़ी है। हालांकि प्रधानमंत्री की इस बात से जनता भी इत्तेफाक रखती है, कहना मुश्किल है। 'बहुत हुई महंगाई की मार, अब की बार मोदी सरकार' के सुहाने सपने दिखाकर सत्तासीन हुई मोदी सरकार में डीजल-पेट्रोल की महंगाई ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं। रुपया रोज अवमूल्यन का शिकार हो रहा है और पेट्रोल तथा डीजल की कीमतें हर दिन एक नई ऊंचाई पर पहुंच रही हैं। जाहिर है इनका प्रभाव महंगाई के रूप में हमारे दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। जनता त्राहि-त्राहि कर रही है और मोदी समेत पूरी भाजपा बागबाग है। यह कुछ उसी तरह है कि रोम जल रहा था और नीरो बंशी बजा रहा था।

इससे इतर एक तरफ प्रधानमंत्री ने विपक्ष की अवधारणा पर सवालिया निशान लगाया तो दूसरी तरफ कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष होना चाहिए, लेकिन उन्हें दुख है कि जो लोग सत्ता में विफल रहे, वे लोग विपक्ष में भी विफल रहे। प्रधानमंत्री के मुताबिक स्वस्थ लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल पूछना चाहिए, जवाबदेही के बारे में चर्चा करनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। हालांकि यहां भी झोल दिखाई पड़ रहा है। सवाल तो लगातार उठ रहे हैं लेकिन जवाब नदारद है। नोटबंदी से लेकर राफेल तक तमाम सवाल मुंह बाये जवाब का इंतजार कर रहे हैं, परंतु जवाब है कि गधे के सिर से सिंग की तरह से गायब है। राफेल सौदे में एचएएल की बनिस्बत अनिल अंबानी की सद्यजात कंपनी को तरजीह देने की क्या मजबूरी थी या फिर राफेल की कीमतों में तीन गुना उछाल का क्या माजरा है इसका सीधा सवाल देने के बजाय विपक्ष को झूठा ठहराने का अभियान चलाया जा रहा है। फिर भी राफेल ऐसा नासूर बनता जा रहा है जो सरकार की चमक को हर दिन धुंधला कर रहा है। ऐसे में डर है कि कहीं यह मोदी सरकार का बोफोर्स न साबित हो जाये।

बहरहाल, कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दिक्कत यह है कि वे न तो मुद्दों पर लड़ते हैं, न काम के विषय पर लड़ते हैं, वे झूठ पर लड़ते हैं। झूठ बोलना, झूठ गढ़ना और झूठ दोहराना ही उनका काम रह गया है लेकिन हमारी समस्या यह है कि हमें झूठ के साथ लड़ना नहीं आता। परंतु अब एक रणनीति के साथ हम उनके झूठ से भी लड़ेंगे। हालांकि कांग्रेस के लिए झूठा शब्द का उन्होंने इस्तेमाल किया है लेकिन जनता प्रधानमंत्री की इस बात पर भरोसा करने को तैयार नहीं दिखती, क्योंकि उसे लगता है कि चुनाव के दौरान रोजगार से लेकर काले धन तक किया गया प्रधानमंत्री का हर वादा अब तक झूठा ही साबित हुआ है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के बारे में कहा कि आज छोटे-छोटे दल भी कांग्रेस के नेतृत्व को नहीं स्वीकार कर रहे हैं। कई दल तो कांग्रेस के नेतृत्व को बोझ समझते हैं। पीएम के मुताबिक महागठबंधन का मतलब है, नेतृत्व का पता नहीं, नीति अस्पष्ट और नियत भ्रष्ट। हो सकता है प्रधानमंत्री की ये सारी बातें सही हों लेकिन जनता में बढ़ती निराशा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हर दिन उसके सपने टूट रहे हैं। अगर यही हालात रहे तो आम चुनाव में लेने के देने भी पड़ सकते हैं।

-बद्रीनाथ वर्मा

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