जम्मू-कश्मीर पर सर्वदलीय बैठक सकारात्मक कदम, चुनाव से पहले मिले पूर्ण राज्य का दर्जा: कर्ण सिंह

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 25, 2021

नयी दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जम्मू-कश्मीर के नेताओं के साथ बैठक को ‘बहुत सकारात्मक कदम’ करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि विधानसभा चुनाव कराने से पहले पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कदमों से जम्मू-कश्मीर के लोगों का ‘घाव भरने’ में मदद मिलेगी। कश्मीर के भारत में विलय की शर्तों पर हस्ताक्षर करने वाले महाराज हरि सिंह के पुत्र कर्ण सिंह के मुताबिक, उनकी निजी राय में प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि अनुच्छेद 370 को खत्म करने का फैसला ‘अपरिवर्तनीय’ है, हालांकि इन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह विषय उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन है और अब वहीं फैसला होना चाहिए।

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के अनुसार, जम्मू-कश्मीर का दर्जा बदलने के बाद राजनीतिक परिस्थिति ठहर सी गई थी, ऐसे में यह बैठक राजनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत होना है जिसका स्वागत किया जाना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर राजनीतिक दलों ने पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग की, तो उन्होंने कहा कि यह सबका विचार था क्योंकि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बना देने को राज्य में किसी ने नहीं सराहा। उन्होंने चुनाव से पहले पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली की मांग करते हुए कहा, ‘‘पूर्ण राज्य का दर्जा एक सार्वभौमिक मांग है। अब पहला कदम परिसीमन का है। परिसीमन आयोग पहले ही काम कर रहा है और उसे जल्द रिपोर्ट सौंपनी चाहिए। परिसीमन के बाद का अगला कदम चुनाव है। मेरी राय है कि हमें एक पूर्ण राज्य में चुनाव कराना चाहिए।’’

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कर्ण सिंह के मुताबिक, यह एक विडंबना है कि उनके पिता ने पूर्ण राज्य के लिए विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे और ‘आज हम पूर्ण राज्य के दर्जे के लिए लड़ाई लड़नी पड़ रही है।’ यह पूछे जाने पर कि पूर्ण राज्य के दर्जे की बहाली से ‘दिल की दूरी’ खत्म हो जाएगी तो उन्होंने कहा कि इससे लोगों के घावों को भरने में मदद मिलेगी, लेकिन सिर्फ यही एक कदम पर्याप्त नहीं होगा, इतना जरूर है कि यह बड़ा कदम होगा। अनुच्छेद 370 की बहाली से संबंधित जम्मू-कश्मीर के कुछ नेताओं की मांग पर सिंह ने अपनी निजी राय रखते हुए कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि ये बदलाव अपरिवर्तनीय हैं, लेकिन यह मामला उच्चतम न्यायालय के विचाराधीन है और ऐसे में हमें इस बारे में विस्तृत टिप्पणी नहीं करनी चाहिए कि इस पर क्या होना चाहिए या नहीं होना चाहिए।

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