PoK सुलग रहा, Afghanistan भड़क रहा, दो मोर्चों पर घिर चुके Pakistan की उलटी गिनती शुरू

By नीरज कुमार दुबे | Jun 10, 2026

पाकिस्तान का दुस्साहस अब हर सीमा पार करता जा रहा है। एक तरफ वह पीओके में आम जनता पर जुल्म और दमन की सारी हदें पार कर रहा है, दूसरी तरफ अफगानिस्तान की जमीन पर लगातार बम बरसाकर मासूमों की जान ले रहा है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि पाकिस्तान के खिलाफ दो तरफ से मोर्चा खुलने की आशंका गहराने लगी है। पीओके में जनता खुलकर इस्लामाबाद के खिलाफ सड़कों पर उतर आई है, जबकि अफगानिस्तान भी पाक हमलों पर आगबबूला है। इसी बीच सामने आई एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के सामने पाक सेना की असलियत खोल कर रख दी है। हम आपको बता दें कि जिस सेना को इस्लामाबाद अपनी सबसे बड़ी ताकत बताता फिरता है, वही सेना भारत की जवाबी कार्रवाई के सामने बुरी तरह पस्त नजर आई थी। भारत ने जिस सटीकता और ताकत के साथ पाकिस्तान को जवाब दिया था उसने यह साबित कर दिया कि पाकिस्तानी फौज केवल बयानबाजी में बहादुर है, मैदान में नहीं। पाकिस्तानी फौज सिर्फ कमजोर और निर्दोषों पर जुल्म ढाने में ही अपनी बहादुरी दिखा पाती है।

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सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो पाकिस्तान के उस चेहरे को उजागर कर रहे हैं जिसे वह दुनिया से छिपाने की कोशिश करता रहा है। बाजार बंद हैं, सड़कों पर सन्नाटा है और जगह जगह सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पाकिस्तान ने पीओके में संचार सेवाओं पर भी रोक लगाने की कोशिश की है ताकि वहां हो रहे अत्याचार दुनिया तक न पहुंच सकें। कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां लगातार जारी हैं। लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार पीओके को एक उपनिवेश की तरह चला रही है और वहां के नागरिकों को बुनियादी अधिकार तक नहीं दिए जा रहे हैं।

उधर, पाकिस्तान की इस दमनकारी कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। ब्रिटेन की संसद के पचास से ज्यादा सांसदों ने खुलकर पीओके की स्थिति पर चिंता जताई है। ब्रिटिश सांसद इमरान हुसैन ने कहा कि पीओके में लगातार बंदी, संचार अवरोध और गिरफ्तारियों की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। सांसदों ने ब्रिटिश सरकार से मांग की है कि वह राजनयिक माध्यमों से पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि नाकाबंदी हटे, संचार बहाल हो और कश्मीरियों के मानवाधिकारों का सम्मान किया जाए।

दूसरी ओर, अफगानिस्तान में भी पाकिस्तान का आक्रामक चेहरा सामने आया है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान पर नए हवाई हमलों का आरोप लगाया है। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के अनुसार पाक सेना ने खोस्त, कुनार और पक्तिका प्रांतों में नागरिक ठिकानों पर बमबारी की। इन हमलों में ग्यारह बच्चों, एक महिला और एक बुजुर्ग की मौत हो गई जबकि चौदह लोग घायल हुए हैं। तालिबान ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध बताया है। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान पर अफगान सीमा में घुसकर हमला करने का आरोप लगा हो। दोनों देशों के बीच महीनों से संघर्ष जारी है और सीमा पर लगातार तनाव बना हुआ है।

हम आपको बता दें कि पाकिस्तान अफगानिस्तान पर आतंकियों को शरण देने का आरोप लगाता है, जबकि काबुल इन आरोपों को खारिज करता रहा है। लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान अब अपने ही बनाए जाल में फंसता जा रहा है। एक तरफ पीओके में जनता का गुस्सा फूट रहा है, दूसरी तरफ अफगानिस्तान में उसकी सैन्य कार्रवाई उसके खिलाफ माहौल बना रही है।

इसी बीच, भारत को लेकर सामने आई जानकारी ने पाकिस्तान की बेचैनी और बढ़ा दी है। पाकिस्तान सरकार के एक दस्तावेज में दावा किया गया है कि भारत ने सात से ज्यादा अतिरिक्त स्थानों पर हमले किए थे, जिनका खुलासा आधिकारिक तौर पर नहीं किया गया। इसमें अटक, बहावलनगर, गुजरात, झंग, पेशावर, छोर और हैदराबाद जैसे इलाकों का जिक्र किया गया है। पाकिस्तान का कहना है कि इन हमलों में भारी नुकसान हुआ।

असल में यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले में छब्बीस निर्दोष लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत सात मई को आतंक के ढांचों पर सटीक प्रहार किए थे। पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन किसी नागरिक क्षेत्र या सैन्य अड्डे पर हमला नहीं किया गया। भारत ने साफ कर दिया कि उसका लक्ष्य केवल आतंकवाद है। इसके बावजूद पाकिस्तान ने जब भारतीय सैन्य ठिकानों और नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने की कोशिश की, तब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई हवाई अड्डों और रडार ठिकानों को तबाह कर दिया था। यही वह क्षण था जिसने पाक सेना की पोल खोल दी। दुनिया ने देखा कि भारत ने बिना शोर मचाए पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को गहरी चोट पहुंचाई, जबकि पाकिस्तान केवल दावे करता रह गया।

बहरहाल, आज हालात यह हैं कि पीओके में जनता विद्रोह पर उतारू है, अफगानिस्तान पाकिस्तान पर युद्ध जैसे आरोप लगा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस्लामाबाद की नीतियों पर सवाल उठा रहा है। यही नहीं, आर्थिक हालात विकट होने के चलते पाकिस्तान के अन्य शहरों से भी सरकार और सेना विरोधी आवाजें मुखर होने लगी हैं। इस तरह पाकिस्तान अब चारों तरफ से घिरता दिखाई दे रहा है।

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