मिल्कीपुर सीट पर योगी और अखिलेश की सियासी टक्कर, दोनों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल

By अजय कुमार | Jan 08, 2025

चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के साथ उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है। यह उपचुनाव 5 फरवरी 2025 को आयोजित होगा, जबकि मतगणना 8 फरवरी 2025 को होगी। इस चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'मिशन मिल्कीपुर' के तहत पूरी ताकत झोंक दी है, क्योंकि यह सीट उनके लिए विशेष महत्व रखती है। अयोध्या में लोकसभा चुनाव 2024 में मिली हार के बाद, योगी आदित्यनाथ ने इस उपचुनाव को अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए सपा के खिलाफ अपने राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने की रणनीति तैयार की है।


मिल्कीपुर सीट पर वोटिंग की तारीख के ऐलान के साथ ही, यूपी सरकार ने इस उपचुनाव के लिए अपनी पूरी मंत्रिमंडल टीम को सक्रिय कर दिया है। सात प्रमुख मंत्रियों को मिल्कीपुर के विभिन्न वर्गों को साधने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, खेल मंत्री गिरीशचंद्र यादव, स्वास्थ्य राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, सतीश चंद्र शर्मा, जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह और जेपीएस राठौर शामिल हैं। ये सभी मंत्री बूथ स्तर पर बैठकें कर वोट बैंक को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने इस उपचुनाव में किसी भी प्रकार की चूक से बचने के लिए पूरी रणनीति तैयार की है। वह किसी भी कीमत पर यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनकी पार्टी इस सीट पर जीत दर्ज करे।


मिल्कीपुर की यह सीट योगी के लिए न केवल एक चुनावी चुनौती है, बल्कि एक प्रतिष्ठा का सवाल भी बन चुकी है। इस सीट को लेकर उनकी चिंता इस हद तक बढ़ गई है कि उन्होंने महाकुंभ की तैयारियों के बावजूद मिल्कीपुर का पांचवीं बार दौरा किया है। इस दौरान सीएम योगी ने प्रभारी मंत्रियों और संगठन पदाधिकारियों को बूथ मजबूत करने और मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक लाने का संदेश दिया। योगी की यह सक्रियता इस बात का संकेत है कि वह इस उपचुनाव को लेकर कितने गंभीर हैं और उनकी सरकार इसे अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर देख रही है।

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समाजवादी पार्टी के लिए भी यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। मिल्कीपुर सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ रही है, और इस सीट पर भाजपा के खिलाफ सपा ने अपनी राजनीतिक ताकत को स्थापित किया है। सपा के लिए यह चुनौती इसलिए और भी कठिन हो जाती है, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 सीटों में से 37 सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में सपा को निराशा हाथ लगी थी, जहां पार्टी केवल 2 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी। ऐसे में मिल्कीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव में सपा अपने प्रतिष्ठा की लड़ाई लड़ रही है।


मिल्कीपुर सीट छह महीने से रिक्त पड़ी है, क्योंकि सपा के विधायक अवधेश प्रसाद ने 13 जून, 2024 को इस्तीफा दे दिया था। 12 दिसंबर को उनके इस्तीफे को छह महीने पूरे हो गए थे, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव की तारीख का ऐलान किया है। इससे पहले, चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव की तारीखों का ऐलान किया था, लेकिन मिल्कीपुर सीट का मामला अदालत में विचाराधीन था, जिसके कारण इस सीट पर उपचुनाव की तारीख नहीं घोषित हो पाई थी।


मिल्कीपुर के पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ ने 2022 में इस सीट से सपा के विधायक अवधेश प्रसाद के चुनाव को उनके नामांकन पत्रों में विसंगतियों का हवाला देते हुए चुनौती दी थी। हालांकि, चुनाव याचिका को वापस लेने के बाद यह मामला अब तक लंबित था। अब चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव की तारीख तय कर दी है, और राजनीतिक दलों के लिए यह लड़ाई और भी रोमांचक होने वाली है।

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