दिल्ली में इस बार जनता के लिए घोषणापत्र नहीं, लॉटरी पेश कर रहे हैं राजनीतिक दल

By नीरज कुमार दुबे | Jan 27, 2025

इस समय दिल्ली में सेल चल रही है। वैसे अक्सर सेल में 50 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा की छूट दी जाती है लेकिन दिल्ली में चुनावी मौसम में चल रही सेल में 100 प्रतिशत की छूट है। यानि सब कुछ मुफ्त। सब कुछ मुफ्त देने से सरकारी खजाने को कितना नुकसान होगा इसकी परवाह किसी को नहीं है क्योंकि हर पार्टी विधानसभा में अपनी सीटें किसी भी कीमत पर बढ़ाने का प्रयास कर रही है। सब कुछ मुफ्त देने से दिल्ली में महंगाई का आलम क्या होगा यह सोचे बिना राजनीतिक दल गारंटियों पर गारंटियों की घोषणा किये जा रहे हैं। सब कुछ मुफ्त देने से लोगों का सशक्तिकरण होने की बजाय उनके निठल्ले बनने की संभावनाएं ज्यादा हैं लेकिन फिर भी सब कुछ फ्री देने की होड़ में राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे से आगे निकली जा रही हैं। दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय देश में सबसे ज्यादा है उसके बावजूद यहां के लोगों को फ्री में सुविधाएं हासिल करने की आदत लगा दी गयी है। सरकारी खजाने को लूटो और लुटाओ की नीति के चलते दिल्ली का राजस्व नुकसान हुआ, भ्रष्टाचार के अवसर बढ़े, दिल्ली का बजट घाटा बढ़ा लेकिन किसी को कोई परवाह नहीं है इसीलिए यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि दिल्ली की सत्ता पाने को आतुर पार्टियां एक दो नहीं बल्कि अपने आधा आधा दर्जन घोषणापत्र जारी कर रही हैं। पहले चुनावों में किसी राजनीतिक दल का घोषणापत्र उसकी नीतियों, कार्यक्रमों और समस्याओं से निजात दिलाने की रूपरेखा प्रस्तुत करता था लेकिन आज पार्टियों का घोषणापत्र उनकी सत्ता लोलुपता को प्रदर्शित कर रहा है। देखा जाये तो यह घोषणापत्र नहीं बल्कि लॉटरी पेश करने जैसा है।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में मुफ्त चुनावी उपहारों के शोर में असल मुद्दे दब कर रह गये हैं

बहरहाल, देखा जाये तो मुफ्त सुविधाएं केवल अल्पकालिक राहत प्रदान करती हैं। जबकि लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल सिखाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। साथ ही मतदाताओं को इन लाभों की कीमत के बारे में पता होना चाहिए जो अंतत: जनता की जेब से ही आती है। यहां तक कि निर्धनतम व्यक्ति भी अप्रत्यक्ष रूप से टैक्स दे रहा है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसी योजनाएं महिलाओं को स्वतंत्र नागरिक के रूप में पहचान देती हैं, लेकिन वे अक्सर महिलाओं को केवल लाभार्थी के रूप में सीमित कर देती हैं। देश की सरकार जब भारत को आत्मनिर्भर और विकसित बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है तो नागरिकों को सिर्फ लाभार्थी तक सीमित करना गलत होगा क्योंकि सरकार पर निर्भर रह कर कोई व्यक्ति आत्मनिर्भर नहीं बन सकता और बिना हर नागरिक के योगदान के देश विकसित नहीं हो सकता।

-नीरज कुमार दुबे

प्रमुख खबरें

Europe का बड़ा फैसला, अब बिना Charger मिलेगा Laptop, ग्राहकों के बचेंगे हजारों रुपये

Barabanki-Bahraich Highway: 9000 पेड़ों पर अटकी Forest Clearance, NHAI और वन विभाग आमने-सामने

Ahmedabad में AI का सबसे बड़ा धोखा! Deepfake वीडियो से बिजनेसमैन के नाम पर लिया लाखों का Loan.

EPFO का Digital Revolution: अब e-Prapti Portal से Aadhaar के जरिए एक्टिव करें पुराना PF खाता.