By मृत्युंजय दीक्षित | Sep 18, 2026
यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) की 10 वर्षों की गौरवमयी यात्रा और अभूतपूर्व सफलता के बाद केंद्र सरकार ने आगामी 15 अक्तूबर 2026 से इसके माध्यम से दो हजार रुपए से अधिक के कारोबारी भुगतान पर कारोबारियों के लिए 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाने का निर्णय लिया है।
राहुल गांधी व उनका ईको सिस्टम एक सुनियोजित साजिश के तहत सोशल मीडिया पर तरह -तरह की अफवाहें फैला रहा है कि अब डिजिटल लेन-देन कम हो जाएंगे और बाजार में कैश का चलन बढ़ जाएगा। जो लोग कैश की जगह यूपीआई पेमेंट करते हैं उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना होगा। राहुल गांधी व इंडी गठबंधन के नेताओं को लग रहा है कि 0.4प्रतिशत शुल्क की आड़ में वो अपनी राजनीति को चमका लेंगे और मोदी सरकार की छवि को गहरा आघात लगा देंगे। राहुल गांधी ऐसे प्रयास पहले भी कर चुके हैं। राफेल से लेकर कोविड तक और फिर अमेरिका -ईरान युद्ध के मध्य गैस व तेल का संकट पैदा होने पर भी इन लोगों ने सोचा था कि अब तो मोदी सरकार चली ही जाएगी।
आश्चर्यजनक बात ये है कि एक तरफ कांग्रेस नेता राहुल गांधी 0.4प्रतिशत एमडीआर पर मोदी सरकार के पीछे पड़े हैं वहीं संसदीय समिति में शामिल कांग्रेस के सांसदों ने इसका समर्थन किया है। सरकार का विरोध करने से पहले राहुल गाँधी को अपने उन सांसदों से बात करनी चाहिए थी जिन्होंने वित्तीय मामलों की संसद की स्थायी समिति में यूपीआई पर यह टैक्स लगाने का समर्थन किया था। इस समिति में कांग्रेस सांसद तथा पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरीलाल और के. गोपीनाथ जैसे नेता शामिल थे।
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यूपीआई भारत का सफलतम डिजिटल नवाचार है। आज देश का लगभग हर नागरिक डिजिटल भुगतान कर रहा है। आम जनता अपनी जेब में नोट व खुले पैसे रखना भूल चुकी है। यूपीआई से प्रतिदिन 79 करोड़ ट्रांजेक्शन होते हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल प्लेटफार्म बन चुका है जिस पर विगत वर्ष 24 हजार करोड़ ट्रांजेक्शन के माध्यम से 314 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। इतना बड़ा प्लेटफार्म अभी तक पूरी तरह से निः शुल्क चल रहा था। एक वर्ष में डिजिटल प्लेटफार्म को चलाने में 20 हजार करोड़ रुपए खर्च होते हैं और सरकार ने इसे 10 वर्ष तक निःशुल्क चलाया। लेन-देन की संख्या अरबों में पहुंचने के बाद सर्वर ,साइबर सुरक्षा और तकनीकी रख रखाव के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल की जरूरत है। अब चूंकि नियम साफ हो चुके हैं और बडे़ मर्चेट लेन देन पर शुल्क का रास्ता खुल गया है इससे उन बैंकों और फिनटेक कंपनियों की वित्तीय सेहत सुधरेगी जो इस नेटवर्क को चला रह हैं।सरकार का यह निर्णय आते ही फिनटेक कंपनियों की किस्मत चमक गई है और पेटीएम का शेयर 52 सप्ताह के शिखर पर पहुंच गया है।
सरकार ने इस पहली बार यूपीआई की व्यवस्था के खर्च को संबोधित करने के लिए मामूली शुल्क लगाया है। शुल्क लेने में अत्यंत कड़ी शर्तें हैं जिसमें अगर कोई व्यापारी आम जनता से एमडीआर शुल्क के बहाने अधिक पेमेंट की मांग करता है तो वह उपभोक्ता संबंधित दुकानदार व व्यापारी की शिकायत भी कर सकता है। विकसित भारत विरोधी अराजक तत्व अभियान चलाकर, सामान्य जनता को बहका रहे हैं जबकि सत्यता यह है कि 96 प्रतिशत यूपीआई भुगतान अभी भी एमडीआर से बाहर है। सरकार द्वारा बनाए गए नियम एकदम स्पष्ट हैं जिसके अनुसार रेहड़ी पटरी लगाने वालों तथा फल सब्जी आदि बेचने वाले किसी भी छोटे कारोबारी को अतिरिक्त शुल्क कतई नही देना है। प्रतिमाह एक लाख रूपए का कारोबार करने वाले दुकानदार को भी कोई चार्ज नहीं देना है। उपभोक्ता जब कारोबारी को यूपीआई के माध्यम से दो हजार रुपए का भुगतान करेंगे तो उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा। यह शुल्क केवल कारोबारियों पर लगेगा। कारोबारियों से स्पष्ट कहा गया है कि वह शुल्क की वसूली वह ग्राहकों से नही कर सकते। नियमों के अनुसार किसी भी कारोबारी को 2000 रुपए तक पेमेंट एमडीआर से छूट वाला ही रहेगा इसलिए किराना, दवाएं ,रेस्तरां, कैब ,छोटी खरीदारी और रोजमर्रा के अधिकांश भुगतान पर कोई बदलाव नहीं होगा। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा ईंधन और कृषि इनपुट जैसी जरूरी या कम मुनाफे वाले क्षेत्रों को अलग राहत दी गई है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि इस एमडीआर शुल्क से यूपीआई से भुगतान का अनुभव पहले जैसा ही रहेगा अपितु यह और आसान हो जाएगा। ग्राहक के लिए यूपीआई पूरी तरह से निःशुल्क है छोटे भुगतान और व्यापारी पूरी तरह से सुरक्षित हैं केवल 2,000 रुपए से ऊपर के चुनिंदा बड़े कारोबारियों पर 15 अक्तूबर 2026 से सीमित एमडीआर लागू होगा।
विपक्ष के झूठ की गूँज कितनी भी तेज हो भारत की आम जनता अब समझदार हो गई है और बेधड़क यूपीआई का प्रयोग करती रहेगी । राहुल गांधी एंड कंपनी को पहले इस बात का उत्तर देना होगा कि यदि उनको एमडीआर से विरोध था तो उनके सांसदों ने अवसर दिए जाने पर भी इसका विरोध क्यों नहीं किया और क्यों हंगामा कर रहे हैं? स्वाभाविक रूप से राहुल गाँधी की नीयत में खोट है ।
- मृत्युंजय दीक्षित