Pope Francis का निधन, Vatican की परम्पराओं के तहत अब क्या होगा? कैसे चुना जायेगा नया पोप?

By नीरज कुमार दुबे | Apr 21, 2025

पोप फ्रांसिस का 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया। पहले लैटिन अमेरिकी पादरी पोप फ्रांसिस के निधन से दुनिया में शोक की लहर दौड़ गयी है। हम आपको बता दें कि दुनियाभर के 1.4 अरब कैथोलिकों के धार्मिक प्रमुख पोप फ्रांसिस उम्र संबंधी कई बीमारियों से पीड़ित थे और एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहे। उनके निधन के साथ ही कैथोलिकों का सर्वोच्च पद रिक्त हो गया है, जिसे वैटिकन में एक लंबी प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाएगा। हम आपको बता दें कि पोप के निधन के बाद वैटिकन "इंटररेग्नम" अवधि में प्रवेश करता है। यह वह समय होता है जब पोप की मृत्यु हो जाती है और नए धार्मिक प्रमुख का चुनाव नहीं हुआ होता है। इस दौरान सबसे पहले कैमरलेंगो (वैटिकन की संपत्तियों और राजस्व का प्रबंधक) पोप की मृत्यु की पुष्टि करता है। वह ऐसा करने के लिए पोप का बपतिस्मा नाम तीन बार पुकारता है। यदि कोई उत्तर नहीं मिलता, तो वह मृत्यु की घोषणा करता है। हम आपको बता दें कि पोप की मृत्यु के बाद उनके माथे पर चांदी की हथौड़ी से हल्की चोट देने की परंपरा 1963 के बाद समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद वैटिकन अपने आधिकारिक माध्यमों से दुनिया को पोप की मृत्यु की सूचना देता है।

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कैसे चुना जाता है नया पोप?

हम आपको यह भी बता दें कि नए पोप के चुनाव के लिए "पैपल कॉन्क्लेव" पोप की मृत्यु के लगभग 15-20 दिन बाद शुरू होता है। इसमें 80 वर्ष से कम आयु के कार्डिनल वैटिकन में एकत्र होते हैं। यह प्रक्रिया गोपनीय होती है। कार्डिनल सिस्टीन चैपल में बंद कर दिए जाते हैं और बाहरी दुनिया से उनका संपर्क लगभग पूरी तरह से समाप्त हो जाता है। उन्हें मीडिया या फोन तक की अनुमति नहीं होती। इसके बाद कई दौर में मतदान किया जाता है, जब तक कि किसी उम्मीदवार को दो-तिहाई बहुमत न मिल जाए। हर मतदान के बाद मतपत्र जला दिए जाते हैं। यदि कोई निर्णय नहीं होता तो काला धुआं निकलती है, और अगर नया पोप चुना गया है तो सफेद धुआं निकलता है।

हम आपको बता दें कि नए पोप के चुने जाने के बाद उनसे औपचारिक रूप से पूछा जाता है कि क्या वे यह पद स्वीकार करते हैं। यदि वे सहमत होते हैं, तो उन्हें एक नया नाम चुनना होता है, जो अक्सर किसी संत से प्रेरित होता है। इसके बाद सीनियर कार्डिनल डीकन सेंट पीटर्स बेसिलिका की बालकनी से लैटिन में घोषणा करते हैं: "Habemus Papam" (जिसका अर्थ है "हमें एक पोप मिला है")। कुछ क्षणों बाद नया पोप सेंट पीटर्स स्क्वायर में अपने अनुयायियों को संबोधित करता है और उन्हें अपना पहला आशीर्वाद देता है।

पोप के निधन पर दुनियाभर के राजनेता दुख व्यक्त कर रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पोप के निधन पर दुख जताते हुए कहा है कि उन्होंने अपनी विनम्र शैली और गरीबों के प्रति चिंता से दुनिया को मंत्रमुग्ध कर दिया था। मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “परम पावन पोप फ्रांसिस के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। दुख और स्मरण की इस घड़ी में, वैश्विक कैथोलिक समुदाय के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। पोप फ्रांसिस को दुनिया भर के लाखों लोगों द्वारा करुणा, विनम्रता और आध्यात्मिक साहस के प्रतीक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।” उन्होंने कहा, “छोटी उम्र से ही उन्होंने प्रभु ईसा मसीह के आदर्शों को साकार करने के लिए खुद को समर्पित कर दिया था। उन्होंने गरीबों और दलितों की लगन से सेवा की। जो लोग पीड़ित थे, उनके मन में उन्होंने आशा की भावना जगाई।” मोदी ने पोप के साथ अपनी मुलाकातों को याद करते हुए कहा कि वह समावेशी और सर्वांगीण विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से बहुत प्रेरित हुए। मोदी ने कहा, “भारत के लोगों के प्रति उनका स्नेह हमेशा स्मरणीय रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।''

हम आपको याद दिला दें कि पिछले साल प्रधानमंत्री ने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पोप फ्रांसिस से मुलाकात की थी और उन्हें भारत आने का न्यौता भी दिया था। प्रधानमंत्री मोदी और पोप फ्रांसिस ने इटली के अपुलिया में जी7 शिखर सम्मेलन के 'आउटरीच सत्र' में गर्मजोशी से मुलाकात की थी। पोप से मुलाकात के बाद मोदी ने कहा था कि मैं लोगों की सेवा करने और हमारे ग्रह को बेहतर बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं। मोदी को पोप के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत करते हुए और गले मिलते हुए देखा गया था। हम आपको याद दिला दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2021 में भी वेटिकन में पोप फ्रांसिस से मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उस समय कहा था कि भारत और होली सी (कैथोलिक चर्च की वेटिकन स्थित सरकार) के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और ये 1948 में राजनयिक संबंधों की स्थापना के समय से ही हैं।

देखा जाये तो भारत एशिया में दूसरी सबसे बड़ी कैथोलिक आबादी वाला देश है और यहां ईसाई समुदाय के सभी पर्वों को हर भारतीय खुशी खुशी मनाता है। हम आपको यह भी बता दें कि पोप एक धार्मिक शख्सियत तो होते ही हैं साथ ही वेटिकन राज्य के सर्वोच्च शासक भी होते हैं। किसी भी देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जब रोम जाते हैं तो वह वेटिकन राज्य के सर्वोच्च शासक पोप से भी प्रायः मिलते ही हैं।

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