सकारात्मक मीडिया से होगा स्वर्णिम भारत का निर्माण: प्रो.संजय द्विवेदी

By प्रेस विज्ञप्ति | Jul 03, 2022

नोएडा। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा है कि 'स्वर्णिम भारत' के निर्माण में 'सकारात्मक मीडिया' की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को लोकमंगल और विश्व कल्याण की दिशा में कार्य करना चाहिए। अगले 25 वर्षों में हमें इस दिशा में काम करने की जरूरत है। प्रो. द्विवेदी आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा चलाए जा रहे 'अखिल भारतीय समाधान मूलक मीडिया अभियान' के तहत नोएडा के सद्भभावना भवन में 'पत्रकारों के तनाव प्रबंधन' विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। 

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इस अवसर पर मारवाह स्टूडियोज और एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन के अध्यक्ष डॉ. संदीप मारवाह, ऑल इंडिया रेडियो के सलाहकार श्री उमेश चतुर्वेदी, एएनआई टीवी के एचआर डायरेक्टर कैप्टन महेश भाकुनी और इंडियन जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन, दिल्ली के अध्यक्ष श्री राजीव निशाना भी मौजूद रहे।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. द्विवेदी ने कहा कि समाज में मूल्यों के पतन को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है और मीडिया इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि पारिवारिक, सामाजिक और शैक्षिक मूल्यों को फिर से स्थापित करने की आवश्यकता है। मीडिया की भूमिका केवल मनोरंजन और सूचना के प्रसार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक मूल्यों को स्थापित करने की भी है। 


प्रो. द्विवेदी के अनुसार अपनी संस्‍कृति का गुणगान करने के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि हम इसे बचाने के लिए भी आगे आएं। मीडिया का काम है सही की सराहना करना, कमियों को उजागर करना और साथ ही समाधान पेश करना, जिससे मीडिया का एक सकारात्मक रूप दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि मीडिया शक्तिशाली और जिम्मेदार है। उसे यह सोचना होगा कि वह समाज को क्या देना चाहता है। साथ ही उसे ये भी ध्यान रखना होगा कि उनके समाचार का क्या प्रभाव समाज पर पड़ रहा है।


कार्यक्रम में मौजूद डॉ. संदीप मारवाह ने कहा ​कि आपकी शुभ भावना एक पवित्र ऊर्जा बनकर अन्य लोगों तक पहुंच जाती है। उस अदृश्‍य ऊर्जा को आप देख नहीं सकते, पर महसूस कर पाते हैं। लेकिन हमें इस बारे में सोचने की जरूरत है कि हम इस शुभ भावना को अपने भीतर दिन भर में कितनी बार और कितनी देर तक महसूस कर पाते हैं? तनाव बार-बार हावी क्‍यों हो जाता है? हम अपने ही विचारों के कारण सरल जीवन को इतना जटिल क्‍यों बना लेते हैं?कार्यक्रम की मुख्य वक्ता बीके लक्ष्मी ने कहा कि हाइपरटेंशन और शुगर जैसी बीमारियों को कारण तनाव ही है। भय, क्रोध और नकारात्मक विचार तनाव को जन्म देते हैं। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, सभी के लिए शुभकामनाएं रखना और दूसरों के साथ स्वयं की तुलना नहीं करने से आपके जीवन में तनाव कम हो सकता है।

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इंडियन जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन, दिल्ली के अध्यक्ष श्री राजीव निशाना ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज हमें अपने जीवन को बेहतर तरीके से जीने का तरीका सिखाती है। एएनआई टीवी के एचआर डायरेक्टर कैप्टन महेश भाकुनी ने कहा कि हमें खुद को समझने की कोशिश करनी चाहिए। तभी हम अपने जीवन से तनाव को कम कर सकते हैं।ऑल इंडिया रेडियो के सलाहकार श्री उमेश चतुर्वेदी ने कहा कि आध्यात्मिक सशक्तिकरण समय की मांग है और इसी में ही समाज की सभी समस्याओं का निदान समाया हुआ है। स्वस्थ जीवन के लिए राजयोग और ध्यान बेहद आवश्यक है। ब्रह्माकुमारीज के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी बीके सुशांत ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान से पत्रकार चुनौतियों का सामना और समाधान करने की सही सोच एवं नजरिया विकसित कर सकते हैं। आत्म-साक्षात्कार सबसे बड़ा स्ट्रेस बस्टर है।बीके सुनीता ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत किया। मंच संचालन बीके मेधा ने किया और धन्यवाद भाषण बीके ऋचा ने दिया। कार्यक्रम में 60 से अधिक मीडियाकर्मियों ने हिस्सा लिया।

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