By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 04, 2026
पटना, चार अगस्त बिहार सरकार के मंत्री एवं जनता दल (यूनाइटेड) (जद-यू) के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम को ‘‘उम्मीदों के विपरीत’’ बताते हुए मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और उसके घटक दल हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा करेंगे। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को बांकीपुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती थी, जिस पर पार्टी 1995 के बाद से कभी नहीं हारी थी।
श्रवण कुमार ने कहा, ‘‘बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम निश्चित रूप से हमारी अपेक्षाओं के विपरीत है। राजग, जद(यू) तथा अन्य सहयोगी दल इसकी विस्तृत समीक्षा करेंगे। समीक्षा के बाद ही हार के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।’’ जद(यू) विधायक अनंत सिंह ने दावा किया कि लोगों के बीच यह धारणा बन गई है कि नीतीश कुमार को जबरन मुख्यमंत्री पद से हटाया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘यह सही नहीं है, लेकिन लोगों के बीच ऐसी धारणा है कि नीतीश कुमार को जबरन मुख्यमंत्री पद से हटाया गया। लोगों को लगता है कि जिस व्यक्ति ने इतने वर्षों तक उनके विकास के लिए काम किया, उसे पद से हटा दिया गया। यह धारणा भी राजग की हार का एक कारण हो सकती है।’’ अनंत सिंह ने कहा कि जनता ही सर्वोपरि है और वही तय करती है कि चुनाव में कौन जीतेगा और कौन हारेगा।
जद(यू) के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने भी बांकीपुर उपचुनाव में राजग की हार की ‘‘गहन समीक्षा’’ की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नेताओं के साथ-साथ बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से भी चर्चा कर ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए। रजक ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘हम जनादेश का सम्मान करते हैं और प्रशांत किशोर को उनकी जीत पर बधाई देते हैं। हमारे लिए जरूरी है कि समीक्षा केवल नेताओं तक सीमित न रहे, बल्कि बांकीपुर के जमीनी कार्यकर्ताओं को भी इसमें शामिल किया जाए।’’ उन्होंने दावा किया कि राजग ने जनता के विकास के लिए लगातार काम किया है, लेकिन यदि गठबंधन को अपनी स्थिति फिर से मजबूत करनी है तो यह समझना होगा कि लोगों में असंतोष की भावना क्यों पैदा हुई।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इस संबंध में कोई बयान नहीं दिया है। हालांकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा था, ‘‘हम जनता के फैसले को सिर झुकाकर स्वीकार करते हैं। इस हार से सीख लेंगे।
हमारे विरोधियों की तरह हर चुनावी हार का दोष ईवीएम और निर्वाचन आयोग पर नहीं मढ़ेंगे।