Radha Ashtami 2026 पर Premanand Maharaj ने बताया व्रत का सही नियम और पूजन विधि

By दिव्यांशी भदौरिया | Sep 11, 2026

हिंदू धर्म में राधा अष्टमी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री राधा रानी का जन्म हुआ था। इसलिए प्रत्येक वर्ष इस तिथि को राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026)  के रुप में मनाई जाती है। 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब इसे विधिपूर्वक किया जाए। आइए आपको बताते हैं वृंदावन के संत श्री प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार राधा अष्टमी का व्रत कैसे करना चाहिए।

कैसे करें राधा अष्टमी व्रत?

संत प्रेमानंद जी महाराज बताते हैं कि राधा अष्टमी व्रत केवल प्रेम प्राप्ति का व्रत है। इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि प्रात:कालीन बेला में कुछ नहीं खाना चाहिए, क्योंकि राधा रानी प्रकट होती हैं। इसके बाद ही विधिपूर्वक राधा रानी का अभिषेक और श्रृंगार करके पूजा-अर्चना करें। अब उनका चरणामृत लें। उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद कोई विशेष नियम धारण करने की जरुरत नहीं है। सिर्फ श्रीजी का ध्यान करें और लाड़ली जू का कीर्तन करें। प्रेमानंद जी कहते हैं कि राधा अष्टमी के दिन कई तरह के पकवान बनाकर उनका सेवन करना व्रत ही नहीं है।

किस रखा जाएगा राधा अष्टमी व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 सितंबर को दोपहर 1:00 बजे होगी। इस तिथि का समापन 19 सितंबर को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 19 सितंबर को राधा अष्टमी का व्रत किया जाएगा।

दान का महत्व

इस दिन दान करने का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राधा अष्टमी पर दान करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन लाभ के योग बनते हैं। इस दिन सुबह स्नान करने के बाद सच्चे मन से किशोरी जी का पूजा-अर्चना करना चाहिए। फिर मंदिर में या गरीब लोगों को अन्न, धन आदि चीजों का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इन चीजों का दान करने से धन लाभ के योग बनते हैं और राधा रानी की कृपा साधक पर बरसती है। 

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