By अनन्या मिश्रा | Jan 26, 2026
भगवान श्रीकृष्ण के कई शक्तिशाली मंत्र हैं, जिनके जाप करने से जातक के जीवन से कष्टों का निवारण हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा मंत्र है, जिसके निरंतर जाप और नियम पालन के साथ पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से जाप किया जाए, तो 21 दिनों में आपको शुभ परिणाम मिल सकते हैं। वृंदावन के स्वयं प्रेमानंद जी महाराज ऐसा कहते हैं।
उन्होंने यह भी बताया है कि भगवान कृष्ण के इस मंत्र का जाप करने के दौरान मन में सिर्फ श्रीकृष्ण और राधा रानी का स्मरण करना चाहिए। आपके मन में और कुछ नहीं आना चाहिए। यह मंत्र जितना ज्यादा प्रभावशाली है, उतना ही कठिन भी माना जाता है। तो ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि यह मंत्र कौन सा है और इसके जाप से क्या लाभ मिलते हैं।
प्रेमानंद महाराज के मुताबिक 'ऊँ कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणत: क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नम:।।' यह भगवान श्रीकृष्ण का सबसे शक्तिशाली मंत्र है। इस मंत्र में भगवान श्रीकृष्ण के चार प्रमुख नामों कृष्ण, वासुदेव, हरि और परमात्मा को एक साथ आह्वान करता है। जिससे इस मंत्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है।
भगवान श्रीकृष्ण के इस मंत्र का अर्थ है- वासुदेव के पुत्र, भगवान कृष्ण को पापों और दुखों का नाश करने वाला और सर्वोच्च आत्मा को, जो शरण में आए हुए भक्तों के सभी क्लेशों का नाश करते हैं। गायों के पालक को मैं बार-बार नमस्कार करता हैं। नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से कई तरह के लाभ नजर आने लगते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के इस मंत्र का 21 दिनों तक लगातार जाप करने से मानसिक अशांति, चिंता और तनाव होती है। इस मंत्र का जाप करने से मन में एक गहरी शांति और स्थिरता महसूस होने लगती है। यह बेचैनी और भ्रम की स्थिति को समाप्त करता है और आत्मा को सीधे परमात्मा से जोड़ता है। इस मंत्र का जाप करने से जातक की आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है।
जो जातक परिवार में क्लेश, कलह या रिश्तों में तनाव का सामना कर रहा है, वह इस मंत्र के प्रभाव से अपने घर में प्रेम, शांति और सामंजस्य वापस ला सकता है। इस मंत्र को जपने के कुछ सरल नियम या विधि है। सुबह स्नना के बाद या फिर शाम को गोधूलि वेला में एक शांत और स्वच्छ स्थान में बैठकर इस मंत्र का जाप करें।
बता दें कि तुलसी की माला से कम से कम 108 बार इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप शुरू करने से पहले भगवान श्रीकृष्ण से अपनी समस्या को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए और पूर्ण श्रद्धा के साथ पाठ करें। क्योंकि यह मंत्र सिर्फ पाठ नहीं बल्कि भगवान कृष्ण के प्रति संपूर्ण समर्पण का भाव है, जो आपको दुखों से तार सकता है।