योग दिवस मनाने के लिए अपने शहर, कस्बे या गांवों में खास जगह को चुनें :मोदी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | May 29, 2022

नयी दिल्ली|  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाए जा रहे ‘अमृत महोत्सव’ को ध्यान में रखते हुए इस बार देश के 75 प्रमुख स्थानों पर ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का आयोजन होगा। उन्होंने इस अवसर पर लोगों से अपने शहरों, कस्बों और गांवों में खास जगह पर इसे मनाने का आग्रह किया।

मोदी ने कहा, ‘‘अब तो पूरी दुनिया में कोरोना वायरस महामारी को लेकर हालात पहले से कुछ बेहतर लग रहे हैं, अधिक-से-अधिक टीकाकरण कवरेज की वजह से अब लोग पहले से कहीं ज्यादा बाहर भी निकल रहे हैं, इसलिए, पूरी दुनिया में योग दिवस को लेकर काफी तैयारियां भी देखने को मिल रही हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने सभी को यह एहसास भी कराया है कि जीवन में स्वास्थ्य का कितना अधिक महत्व है और योग, इसमें कितना बड़ा माध्यम है।

उन्होंने कहा, ‘‘लोग यह महसूस कर रहे हैं कि योग से शारीरिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक कल्याण को कितना बढ़ावा मिलता है।

विश्व के कारोबारी जगत के शीर्ष लोगों से लेकर फिल्म और खेल जगत की शख्सियत तक, छात्र से लेकर आम लोग तक, सभी, योग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना रहे हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि दुनिया भर में योग की बढ़ती लोकप्रियता को देखकर आप सभी को बहुत अच्छा लगता होगा।’’ इस बार देश-विदेश में ‘योग दिवस’ पर होने वाले कुछ बेहद अनूठे उदाहरणों के बारे में जानकारी मिलने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इन्हीं में से एक है, ‘गार्जियन रिंग’ जो अनूठा कार्यक्रम होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सूर्य की गतिविधि को ध्यान में रखकर मनाया जाएगा, यानी सूरज जैसे-जैसे यात्रा करेगा, धरती के अलग-अलग हिस्सों से, हम, योग के जरिये उसका स्वागत करेंगे। अलग-अलग देशों में भारतीय मिशन वहां के स्थानीय समय के मुताबिक सूर्योदय के समय योग कार्यक्रम आयोजित करेंगे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘एक देश के बाद दूसरे देश से कार्यक्रम शुरू होगा। पूरब से पश्चिम तक निरंतर यात्रा चलती रहेगी, फिर ऐसे ही यह आगे बढ़ता रहेगा।

इन कार्यक्रमों की स्ट्रीमिंग भी इसी तरह एक के बाद एक जुड़ती जायेगी, यानी यह एक तरह का क्रमिक योग स्ट्रीमिंग आयोजन होगा।’’ मोदी ने कहा कि इस बार ‘अमृत महोत्सव’ को ध्यान में रखते हुए देश के 75 प्रमुख स्थानों पर भी ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का आयोजन होगा। उन्होंने कहा, ‘‘इस अवसर पर कई संगठन और देशवासी अपने-अपने स्तर पर अपने क्षेत्र की खास जगहों पर कुछ न कुछ अनूठा करने की तैयारी कर रहे हैं। मैं, आपसे भी ये आग्रह करूंगा, इस बार योग दिवस मनाने के लिए, आप, अपने शहर, कस्बे या गांव में किसी ऐसी जगह चुनें, जो सबसे खास हो।

उन्होंने कहा, ‘‘ये जगह कोई प्राचीन मंदिर और पर्यटन केंद्र हो सकता है, या फिर, किसी प्रसिद्ध नदी, झील या तालाब का किनारा भी हो सकता है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे योग के साथ-साथ क्षेत्र की पहचान भी बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। मोदी ने कहा कि इस समय ‘योग दिवस’ को लेकर 100 दिवसीय उलटी गिनती भी जारी है।

मोदी ने जापान के अपने हालिया दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान उन्हें कुछ शानदार शख्सियतों से मिलने का मौका मिला। मोदी ने कहा, ‘‘वे लोग हैं तो जापान के लेकिन भारत के प्रति इनमें गज़ब का लगाव और प्रेम है। इनमें से एक हैं हिरोशि कोइके जी, जो एक जाने-माने कला निर्देशक हैं। आपको ये जानकर बहुत खुशी होगी कि इन्होंने महाभारत परियोजना को निर्देशित किया है। इस परियोजना की शुरुआत कंबोडिया में हुई थी और पिछले 9 सालों से ये निरंतर जारी है।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हिरोशि कोइके जी हर काम बहुत ही अलग तरीके से करते हैं। वह हर साल, एशिया के किसी देश की यात्रा करते हैं और वहां स्थानीय कलाकारों और संगीतकारों के साथ महाभारत के कुछ हिस्सों का प्रोडक्शन करते हैं।’’

मोदी ने कहा, ‘‘इस परियोजना के माध्यम से उन्होंने भारत, कंबोडिया और इंडोनेशिया सहित नौ देशों में प्रोडक्शन किये हैं और नाट्य प्रस्तुति भी दी है। हिरोशि कोइके जी उन कलाकारों को एक साथ लाते हैं, जिनकी शास्त्रीय और पारंपरिक एशियाई कला में विविध पृष्ठभूमि रही है।

इस वजह से उनके काम में विविध रंग देखने को मिलते हैं। इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और जापान के कलाकार जावा नृत्य, बाली नृत्य, थाई नृत्य के जरिए इसे और आकर्षक बना देते हैं।’’ ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान मोदी ने आत्सुशि मात्सुओ और केन्जी योशी के बारे में भी चर्चा की जो टेम प्रोडक्शन कंपनी से जुड़े हैं।

मोदी ने कहा, ‘‘इस कंपनी का संबंध रामायण की उस जापानी एनिमेशन फिल्म से है, जो 1993 में प्रदर्शित हुई थी। यह परियोजना जापान के बहुत ही मशहूर फिल्म निर्देशक युगो साको जी से जुड़़ी हुई थी।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘करीब 40 साल पहले, 1983 में, उन्हें (युगो साको) पहली बार रामायण के बारे में पता चला था। ‘रामायण’ उनके हृदय को छू गयी, जिसके बाद उन्होंने इस पर गहराई से अनुसंधान शुरू कर दिया।

उन्होंने, जापानी में रामायण के 10 संस्करण पढ़ डाले, और वह इतने पर ही नहीं रुके, वह इसे, एनिमेशन पर भी उतारना चाहते थे।’’ मोदी ने कहा कि अब 30 वर्षों के बाद यह एनिमेशन फिल्म फिर से 4के (रिजॉल्यूशन) में तैयार की जा रही है।

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