चुनाव करीब आये तो प्रियंका के मैदान में उतरने की अटकलें फिर जोरों पर

By संजय सक्सेना | Jan 08, 2019

लोकसभा चुनाव की दस्तक सुनाई देते ही कांग्रेस का एक धड़ा पुनः प्रियंका गांधी वाड्रा के पक्ष में माहौल बनाने लगा है। अबकी बार प्रियंका के राबयरेली से लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है। कहा यह जा रहा है कि स्वास्थ्य कारणों से सोनिया गांधी अबकी से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी ? उनकी जगह प्रियंका गांधी रायबेरली की बागडोर संभाल सकती हैं। इसमें कितनी हकीकत है यह तो दस जनपथ ही बता सकता है, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्रियंका और यूपी के चुनाव एक−दूसरे के पूरक बन गये हैं। उत्तर प्रदेश में जब−जब चुनाव की आहट या फिर प्रदेश में कांग्रेस की हालात पतली दिखाई पड़ती है, तब−तब प्रियंका के चुनाव लड़ने की तमाम अधकचरी जानकारियों के साथ उनका (प्रियंका गांधी वाड्रा) नाम सुर्खियां बटोरने लगता है। माहौल कुछ ऐसा बनाया जाता है मानो प्रियंका के आते ही कांग्रेस के अच्छे दिन आ जायेंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव के समय प्रियंका के इलाहाबाद (नया नाम प्रयागराज) से लोकसभा चुनाव लड़ने की खबरों ने खूब सनसनी पैदा की थी, तो 2017 के विधान सभा चुनाव के समय भी, 'बज रहा है प्रदेश में डंका, आने को हैं बहन प्रियंका' जैसे स्लोगन लिखे पोस्टर इलाहाबाद में इधर−उधर खूब दिखाई दिए।

बात 2014 के लोकसभा चुनाव की कि जाये तो उस समय प्रियंका लोकसभा का चुनाव तो लड़ती नहीं दिखीं, लेकिन मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में जरूर उन्होंने कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार किया था। चुनाव प्रचार के दौरान प्रियंका की सियासत पर मजबूत पकड़ होने की छाप स्पष्ट दिखाई दी तो कुछ लोगों को प्रियंका में इंदिरा की छवि नजर आई, लेकिन उनके एक बयान ने कांग्रेस को नुकसान भी खूब पहुंचाया। चुनाव प्रचार के दौरान तब के बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेन्द्र मोदी को लेकर प्रियंका के एक विवादित बयान के चलते कांग्रेस को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। प्रियंका ने चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में कह दिया था कि मोदी नीची राजनीति करते हैं। मोदी ने प्रियंका के इस बयान को अपनी जाति से जोड़कर कहना शुरू कर दिया कि मेरी जाति को नीच बताया जा रहा है। मोदी ने कांग्रेस पर जबरदस्त हमला किया जिसका फायदा भी बीजेपी को मिला था।

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इसी प्रकार 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय एक तरफ कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर पार्टी के लिए चुनावी समीकरण बना रहे थे तो दूसरी तरफ कांग्रेसी कार्यकर्ता गांधी परिवार के पैतृक शहर इलाहाबाद में कांग्रेस की कमान प्रियंका गांधी को दिए जाने को लेकर फेसबुक पर बाकायदा कैंपेन चला रहे थे। इतना ही नहीं उसी समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इलाहाबाद पहुंचने पर उनके सामने भी कार्यकर्ताओं ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारने की गुजारिश की थी। चुनाव में रणनीतिकार के रूप में हायर किए गए प्रशांत किशोर ने भी अपने फीडबैक में कहा था कि सीएम के तौर पर यदि प्रियंका गांधी का नाम आगे किया जाए तो कांग्रेस की संभावना बढ़ जाएगी। यूपी विधानसभा चुनाव के समय स्थिति यह हो गई थी कि कांग्रेस के यूपी प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने सार्वजनिक तौर पर उन्हें कांग्रेस का कमांडर इन चीफ करार दे दिया था, लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद उनकी सक्रियता पूरी तरह खत्म हो गई थी।

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पुरानी बातों को दरकिनार कर इस वर्ष अप्रैल−मई में होने वाले लोकसभा चुनाव की कि जाये तो इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव में रायबरेली सीट से प्रियंका गांधी वाड्रा के कांग्रेस उम्मीदवार होने की चर्चा फिर से न केवल सुनने को मिलने लगी हैं बल्कि इसकी तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। रायबरेली में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में फेरबदल में प्रियंका की ही राय को तवज्जो दी जा रही है। प्रियंका के चुनाव मैदान में आने की बात को इसलिए भी बल मिल रहा है क्योंकि पिछले चुनाव के बाद से सोनिया गांधी की सक्रियता क्षेत्र में काफी कम रही है। वह यहां न के बराबर पहुंचीं, जबकि प्रियंका गांधी लगातार सक्रिय हैं। स्थानीय कांग्रेसी नेता रायबरेली से सीधे तौर पर प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने का दावा तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि कौन चुनाव लड़ेगा, 'तो वह बिना लाग−लपेट के कहते हैं कि सोनिया गांधी नहीं तो, गांधी परिवार का ही कोई सदस्य चुनाव लड़ेगा।

- संजय सक्सेना

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